मुंबई, एजेंसी। देश में सोने के बदले कर्ज यानी गोल्ड लोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक गोल्ड लोन की कुल बकाया राशि बढ़कर ₹18.6 लाख करोड़ पहुंच गई है, जो पिछले एक साल में 50.4% की मजबूत बढ़ोतरी दर्शाती है। बढ़ती सोने की कीमतों, आसान कर्ज सुविधा और इमरजेंसी फंड की जरूरत ने इस सेगमेंट को देश के सबसे तेजी से बढ़ते लोन बाजारों में शामिल कर दिया है।

दक्षिण भारत का दबदबा
देश के कुल गोल्ड लोन का करीब 75% हिस्सा सिर्फ पांच दक्षिण भारतीय राज्यों—तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल—से आता है। इन राज्यों में कुल गोल्ड लोन बकाया लगभग रू.13.94 लाख करोड़ है।
- Tamil Nadu : 5.96 लाख करोड़ रुपए
- Andhra Pradesh : 3.08 लाख करोड़ रुपए
- Karnataka : 2.18 लाख करोड़ रुपए
- Telangana : 1.60 लाख करोड़ रुपए
- Kerala : 1.45 लाख करोड़ रुपए
विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण भारत में सोने में निवेश की मजबूत परंपरा और छोटे कारोबारों में गोल्ड लोन के व्यापक इस्तेमाल के कारण यहां इसकी मांग सबसे ज्यादा है।
उत्तर भारत और बड़े राज्यों में कम हिस्सेदारी
देश की सबसे बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन का कुल आकार सिर्फ रू.42,300 करोड़ है। वहीं महाराष्ट्र में रू.1.11 लाख करोड़, गुजरात में रू.57,100 करोड़, राजस्थान में रू.41,700 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब रू.35,000 करोड़ का गोल्ड लोन दर्ज किया गया है।
बड़े टिकट गोल्ड लोन की मांग बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा रकम का गोल्ड लोन ले रहे हैं। खासतौर पर रू.2.5 लाख से ऊपर वाले गोल्ड लोन में तेजी देखी जा रही है। मेडिकल इमरजेंसी, छोटे कारोबार और घरेलू जरूरतों के लिए लोग तेजी से गोल्ड लोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
PSU बैंक आगे, NBFC की भी मजबूत पकड़
सरकारी बैंक अभी भी गोल्ड लोन बाजार में सबसे आगे हैं लेकिन CRIF High Mark के अनुसार NBFC कंपनियां छोटे टिकट लोन में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई और आसान क्रेडिट की बढ़ती जरूरत के चलते आने वाले समय में गोल्ड लोन बाजार और तेजी से बढ़ सकता है।
