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10 बकरियों से शुरू हुआ सफर, आज 40 से अधिक बकरियों की मालकिन हैं प्रमिला सिंह

बकरी पालन ने बदली जिंदगी, पक्का हुआ घर और बेटी की शादी का सपना भी हुआ पूरा
कोरबा 21 सितंबर 2026। कभी आर्थिक तंगी के कारण परिवार की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करना भी चुनौती था। कच्चे मकान में रहने वाली प्रमिला सिंह के सामने अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के साथ बेटी की शादी और पक्का मकान बनाने की चिंता भी थी। सीमित आय और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने से परिवार की मासिक आय लगभग 4 से 6 हजार रुपये तक ही थी। ऐसे समय में बकरी पालन उनके लिए आजीविका का नया सहारा बनकर सामने आया और इसी ने धीरे-धीरे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी।

जिला कोरबा के मोहल्ला पतरापाली निवासी 48 वर्षीय श्रीमती प्रमिला सिंह, पति धरमसिंह को वर्ष 2022 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बकरी पालन के लिए सहायता मिली। पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें 66 हजार रुपये की लागत से 10 बकरी और एक बकरा प्रदान किया गया। विभाग द्वारा समय-समय पर पशुओं की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और आवश्यक परामर्श भी दिया गया। विभागीय सहयोग और स्वयं की मेहनत से प्रमिला ने बकरी पालन को केवल योजना का लाभ लेने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी नियमित आजीविका का माध्यम बना लिया।
शुरुआत में मिली 10 बकरियों और एक बकरे से शुरू हुआ उनका यह सफर आज 40 से अधिक बकरियों के समूह तक पहुंच चुका है। समय पर टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य संबंधी सलाह मिलने से पशुओं की मृत्यु दर कम रही और बकरी पालन का दायरा लगातार बढ़ता गया। इसके साथ ही परिवार की मासिक आय भी बढ़कर लगभग 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
बकरी पालन से होने वाली अतिरिक्त आमदनी ने प्रमिला सिंह के परिवार के कई अधूरे सपनों को पूरा करने में मदद की। जिस पक्के मकान को बनाना कभी उनके लिए मुश्किल था, वह अब हकीकत बन चुका है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपनी बेटी का विवाह भी सफलतापूर्वक संपन्न कराया। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके परिवार में न केवल खुशहाली लाई, बल्कि भविष्य को लेकर उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।
प्रमिला सिंह बताती हैं कि “ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और पशुधन विकास विभाग के सहयोग से मुझे 10 बकरी और एक बकरा मिला था। विभाग की ओर से समय पर टीकाकरण और जरूरी सलाह मिलती रही। मेहनत और देखभाल से आज मेरे पास 40 से अधिक बकरियां हैं। बकरी पालन से मेरी आय बढ़ी और इसी आमदनी से मैंने पक्का मकान बनवाया तथा अपनी बेटी की शादी भी अच्छे से की।”
आज प्रमिला सिंह अपने क्षेत्र में सफल पशुपालक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं का सहयोग और मेहनत के बल पर सीमित संसाधनों से भी आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है। कभी आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा उनका परिवार आज बकरी पालन को अपनी मजबूत आजीविका का आधार बनाकर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और पशुधन विकास विभाग का सहयोग प्रमिला सिंह के लिए आर्थिक बदलाव के साथ-साथ आत्मविश्वास और सम्मान की नई पहचान लेकर आया है।

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