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छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 12 को दिखना बंद:कांग्रेस ने बताया अंखफोड़वा कांड पार्ट- 2; डॉक्टर, स्टाफ नर्स, नेत्र सहायक अधिकारी सस्पेंड

रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद के गलत ऑपरेशन से 12 आदिवासी बुजुर्गों को दिखना बंद हो गया है। 22 अक्टूबर को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में 20 लोगों का ऑपरेशन हुआ था। सर्जरी के बाद कुछ लोगों कोआंख में खुजली, दर्द और ना दिखने की शिकायत हुई।

मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, 12 मरीज दंतेवाड़ा से रायपुर रेफर किये गये हैं। सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है और संक्रमण नियंत्रण में है लेकिन दृष्टि की संभावना को लेकर फिलहाल बताया जा सकना संभव नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्री ने की मरीजों से मुलाकात।

स्वास्थ्य मंत्री ने की मरीजों से मुलाकात।

दवाओं से हो सकता इन्फेक्शन- डॉ राकेश गुप्ता

कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के डॉ राकेश गुप्ता ने दंतेवाड़ा से आए मरीजों से सोमवार को मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इन्फेक्शन दवाओं और हाइजीन की वजह से हो सकता है। इसकी जांच होनी चाहिए। हम सरकार से मांग करते हैं इन्हें उचित इलाज और मुआवजा दिया जाए।

कांग्रेस ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए अपनी जांच टीम भी गठित कर दी है। कांग्रेस ने इसे अंखफोड़वा कांड पार्ट 2 बताया है। 2011 में भी गलत इलाज से 40 से ज्यादा लोगों की रोशनी चली गई थी।

रविवार को स्वास्थ्य मंत्री ने मुलाकात की, कार्रवाई भी हुई

दंतेवाड़ा से मरीजों के रेफर होने के बाद रविवार को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी अस्पताल पहुंचे और मरीजों का हाल-चाल जाना। इसके बाद सर्जरी करने वाली डॉ गीता नेताम, ममता वेदे स्टाफ नर्स और दीप्ति टोप्पो नेत्र सहायक अधिकारी को सस्पेंड किया गया है।

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