DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

छत्तीसगढ़ में 4 साल में 285 बंदियों की मौत:हर साल 50 से ज्यादा डेथ, बीमारी-सुसाइड प्रमुख कारण, विपक्ष बोला- खाली पड़े डॉक्टर्स के पद

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पिछले 4 सालों में राज्य की अलग-अलग जेलों में कुल 285 बंदियों की मौत हुई है। हर साल 50 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई है। 2022 में सबसे ज्यादा 90 मौतें हुई हैं।

विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल पर सरकार ने लिखित जवाब में यह आंकड़े पेश किए। रिपोर्ट के अनुसार इन मौतों की मुख्य वजह गंभीर बीमारियां और आत्महत्या रही हैं। हालांकि, इसकी जानकारी नहीं दी गई कि सुसाइड से कितनी मौतें हुईं हैं।

वहीं विपक्ष का कहना है कि जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी रखे जा रहे हैं। इस वजह से संक्रमण और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। जेलों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और मनोचिकित्सकों की कमी है।

बीमारी और आत्महत्या बने प्रमुख कारण

जेल विभाग की दी गई जानकारी के अनुसार मृत बंदियों में से अधिकांश लंबी बीमारी से ग्रसित थे। जेलों के भीतर चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और समय पर इलाज न मिलने के आरोपों के बीच सरकार की ओर कहा गया कि कई कैदी भर्ती होने के समय से ही क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे थे।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल विधानसभा में कैदियों की मौत से संबंधित सवाल पूछते हुए।

रायपुर सेंट्रल जेल में बंद कैदी सुनील महानंद ने 3 महीने पहले सुसाइड किया था।

विधानसभा में पूर्व सीएम ने उठाया था मुद्दा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में जेलों की स्थिति और बंदियों के मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे। जवाब में बताया गया कि कुल 285 बंदियों की मौत हुई, जो प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद थे।

इन बंदियों की मौत के प्रमुख कारण हार्ट अटैक, टीबी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां रहीं, जबकि कुछ मामलों में फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले सामने आए। बंदियों की मौत के बाद हर मामले में नियमानुसार न्यायिक जांच कराई गई है।

रायपुर सेंट्रल जेल में बंद बीमार कैदी योगेन्द्र कुमार बंजारे (29) की 30 मई को मौत हो गई थी।

विपक्ष बोला- जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी

विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रखे जा रहे हैं, जिससे संक्रमण और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

जेलों में डॉक्टरों के खाली पद और मनोचिकित्सकों की कमी को भी इन मौतों का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। वहीं सरकार ने आश्वासन दिया है कि जेलों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने और बंदियों की काउंसिलिंग के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं।

Exit mobile version