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अयोध्या में 30 लाख दीये जलाए जा रहे:शोभायात्रा में रामायण के 7 कांड दिखाए, उपराष्ट्रपति, सीएम योगी समेत कई मंत्री मौजूद

अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या में आज 10वां दीपोत्सव मनाया जा रहा है। यहां सरयू नदी के किनारे 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाए जा रहे हैं। इस बार नया रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसके बाद बाद लेजर शो होगा।

इसके पहले अयोध्या में करीब 3 घंटे तक शोभा यात्रा निकाली गई। इसमें 21 झांकियां शामिल थीं। इनमें रामायण के सात कांडों को दर्शाया गया था।

दीपोत्सव देखने के लिए मुंबई, गुजरात और बिहार सहित देशभर से लोग पहुंचे हैं।

राम मंदिर में संतों ने की चर्चा

दीपोत्सव पर रामलला का दरबार सजाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिर में दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास शास्त्री, राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य एवं श्रीराम वल्लभा कुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास, आचार्य मिथिलेशनंदनी शरण और महंत दिनेंद्र दास ने चर्चा की।

उपराष्ट्रपति बोले- योगी पर पूरा भरोसा, यूपी सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें सीएम योगी पर पूरा भरोसा है कि उत्तर प्रदेश सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि योगी असंभव को संभव बना देते हैं। इसके लिए उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं।

उपराष्ट्रपति ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। हम सभी मिलकर भारत को महाशक्ति बनाने में कामयाब होंगे। अंत में उन्होंने ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हिंद’ के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

उपराष्ट्रपति बोले- पहले यूपी आने पर सुरक्षित महसूस नहीं करता था

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हिंदू धर्म में सभी को समान माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि भी एक सामान्य परिवार से आते थे, लेकिन उन्होंने रामायण की रचना की।

उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जब वह यूपी आते थे तो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे, लेकिन अब प्रदेश सुरक्षित हाथों में है।

उन्होंने काशी में हुई एक मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए कहा कि हाल ही में उन्होंने एक व्यक्ति से पूछा कि क्या अब कोई समस्या है? इस पर उस व्यक्ति ने बताया कि अब कोई समस्या नहीं है। पहले वह छोटे-मोटे अपराध करता था, लेकिन योगी सरकार आने के बाद अब अपना व्यापार कर रहा है।

उपराष्ट्रपति बोले- कारसेवकों के बलिदान से बना मंदिर

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बहुत लंबे समय बाद कोई संत किसी राज्य का मुख्यमंत्री बना है। उन्होंने कहा कि वह भी बेहद सामान्य परिवार से आते हैं, इसके बावजूद देश के उपराष्ट्रपति बने। यह सब कैसे संभव हुआ, यह भारत की व्यवस्था और परंपरा को दर्शाता है।

राम मंदिर के निर्माण के लिए अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया। उनके संघर्ष के बाद आज यह मंदिर बना है। यह मंदिर हिंदुओं के आत्मसम्मान का प्रतीक है। आज अयोध्या में हो रहा विकास विरासत के संरक्षण और विकास का एक अच्छा उदाहरण है।

उपराष्ट्रपति बोले- 500 साल तक रामभक्तों के लिए अधूरा सपना रहा राम मंदिर

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि करीब 500 साल तक राम मंदिर रामभक्तों के लिए अधूरा सपना बना रहा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अपनी एक पुरानी याद भी साझा की।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “मुझे अच्छी तरह याद है कि जब अशोक सिंघल जी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी थी, तब मेरी मां ने अपने सिर पर ईंट उठाई थी। उस समय मेरी मां ने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका बेटा एक दिन देश का उपराष्ट्रपति बनेगा।

अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया- सीएम योगी

सीएम ने कहा- रामजन्मभूमि आंदोलन में संतों और रामभक्तों ने लंबा संघर्ष किया। अशोक सिंघल के मार्गदर्शन में आंदोलन आगे बढ़ा। इसमें अनेक कारसेवकों ने बलिदान दिया। एक समय ऐसा भी था, जब अयोध्या में रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलाई गईं। भगवान श्रीराम का नाम लेने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया।

पीएम के नेतृत्व और मार्गदर्शन में अयोध्या अपनी खोई हुई गौरवशाली पहचान फिर से प्राप्त कर रही है। रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं और अयोध्या अपनी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान के साथ एक बार फिर विश्व पटल पर स्थापित हो रही है।

सीएम योगी बोले- 500 साल के संघर्ष के बाद भव्य मंदिर में विराजे रामलला

सीएम ने कहा कि श्रीराम भारत के संस्कार हैं। वे राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। यही वजह है कि शास्त्रों में सात पवित्र पुरियों में अयोध्या को पहली पुरी के रूप में मान्यता दी गई है। अयोध्या के रोम-रोम में श्रीराम विराजमान हैं।

अयोध्या ने अपने इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है। रामभक्तों, संतों, निहंगों और समाज के हर वर्ग ने इनका डटकर मुकाबला किया। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के दौरान कई बार यह सवाल उठा कि क्या रामलला फिर अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो पाएंगे।

सीएम योगी बोले- आज की अयोध्या करा रही त्रेतायुग की याद

सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में रामलला के विराजमान होने के समय आसमान से पुष्पवर्षा का दृश्य दिखाई दिया था। आज की अयोध्या भी त्रेतायुग की याद दिला रही है। कल्पना कीजिए, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद जब प्रभु श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और पवनपुत्र हनुमान के साथ अयोध्या लौटे होंगे, तब अयोध्यावासियों ने पूरी नगरी को किस तरह सजाया होगा। उस समय भी अयोध्या उत्सव और उल्लास से सराबोर हुई होगी।

उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई ‘अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि नभ छाई॥’ का उल्लेख करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने त्रेतायुग की अयोध्या का जो चित्रण किया था, आज की रामनगरी उसी का स्मरण करा रही है। अयोध्या का वैभव, भव्यता और उत्सव का माहौल प्रभु श्रीराम के आगमन की स्मृतियों को जीवंत कर रहा है।

सीएम योगी बोले- श्रीराम भारत के आत्मसम्मान

सीएम योगी ने जयकारे के साथ अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने के प्रसंग को जीवंत करता है। आज की अयोध्या को देखकर ऐसा लगता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और माता जानकी के लौटने पर अयोध्यावासियों ने जिस दृश्य को देखा होगा, वैसा ही दृश्य आज फिर दिखाई दे रहा है। आज की अयोध्या त्रेतायुग की झलक दिखा रही है। अयोध्या और मां सरयू के बारे में लोगों ने अब तक सुना होगा, लेकिन आज उन्हें साकार होते देख रहे हैं। यही भारत की संस्कृति है। श्रीराम भारत के आत्मसम्मान हैं।

सीएम योगी ने उपराष्ट्रपति का किया स्वागत

अयोध्या के रामकथा पार्क में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में सीएम ने उपराष्ट्रपति सीबी राधाकृष्णन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का अयोध्या की पावन धरा पर आगमन हम सभी के लिए गौरव का विषय है। उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से उनका हृदय से स्वागत और अभिनंदन करता हूं।

सीएम योगी ने कहा कि तमिलनाडु के एक सामान्य परिवार में जन्म लेने के बाद उपराष्ट्रपति ने भारतीय परंपराओं, संस्कृति और आदर्शों के प्रति समर्पण भाव से सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल के रूप में सेवाएं दी हैं। आज भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन देश को मिल रहा है।

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