अंबिकापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में 7 साल में अलग-अलग कारणों से 62 हाथी मारे गए हैं। बड़ी वजह है झूलते तारों का करंट। इनमें से 63% यानी 39 की मौत करंट से हुई। इसके बाद भी न वन विभाग, न ही बिजली कंपनी ने झूलते तारों को ठीक करने में मुस्तैदी दिखाई।
सरगुजा संभाग में बिजली कंपनी अब तक सिर्फ 30% झूलते तारों को सही कर सकी है। बाकी तार लटक रहे हैं। खासकर सूरजपुर के इलाकों में झूलते बिजली तार हाथियों के लिए जानलेवा बन गए हैं।
सरगुजा संभाग में 7 साल में अलग-अलग कारणों से 62 हाथी मारे गए हैं। (फाइल फोटो)
77 गांवों के जंगलों में बिजली के तार झूल रहे
सरगुजा जिले के 193 और सूरजपुर जिले के 77 गांवों के जंगलों में बिजली के तार झूल रहे हैं। यह रिपोर्ट वन विभाग ने भी बिजली कंपनी को सौंपी है। कई जगह हाई वोल्टेज तार जमीन से सिर्फ 7 फीट की ऊंचाई पर हैं, जबकि हाथियों की औसत ऊंचाई 9 से 11 फीट होती है।
प्रतापपुर क्षेत्र के अखोरा और करंजवार जैसे इलाकों में स्थिति गंभीर है। हाथी गांवों की ओर बढ़ते हैं, तो ये तार उनकी जान ले लेते हैं। वे जब सूंड ऊपर उठाते हैं, तो भी बिजली के तार की चपेट में आ जाते हैं। शिकार के लिए बिछाए तार भी खतरा हैं।
77 गांवों के जंगलों में बिजली के तार झूल रहे हैं, जिसकी चपेट में आने से हाथियों की जान जा रही है। हाथी गांव में घुस रहा है। (फाइल फोटो)
6 साल में 50 करोड़ हुए खर्च, फिर भी सुरक्षा नहीं
सरगुजा रेंज में हाथियों के संरक्षण के साथ उत्पात रोकने के लिए सरकार ने पिछले सालों में 50 करोड़ खर्च कर डाले, लेकिन ज्यादातर योजनाएं फेल होती चली गईं। अकेले सरगुजा जिले में ही 7 सालों में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल कम हो गया। 12 हजार से अधिक लोगों को सात हजार हेक्टेयर से अधिक का वन अधिकार पत्र बांटा गया है।
प्रतापपुर रेंज के गांव में झूल रहे तार
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर रेंज के पलढ़ा गांव में 25 से 30 हाथियों का दल फसल खाने पहुंचता है। गांव में कई जगह बिजली के तार सात से आठ फीट की ऊंचाई पर झूल रहे हैं। यही हाल सिघरा और मजिरा गांवों का भी है। रामचंद्रपुर इलाके में बिजली का खंभा झुक गया है।
हाथियों को बचाने 30% ही झूलते तार सही कर सके
- 193 गांव हैं सरगुजा में, जहां तार झूल रहे हैं लखनपुर इलाके के 32 गांव प्रभावित
- 11 केवी के तार बलरामपुर में 35 जगह झूल रहे हैं, 33 केवी के तार 9 जगह लूज हैं
- 77 गांवों में हाथियों का विचरण होता है सूरजपुर जिले के, और वहां भी तार झूल रहे हैं
मैनपाट: बिजली खंभे झुक गए
मैनपाट का घटगांव जंगल से घिरा है। रायगढ़ से हाथी आते रहते हैं। गांव के ढलान वाले हिस्से में तार की ऊंचाई 8 फीट तक है। हाथी अगर यहां से गुजरते हैं तो करंट लगना तय है।
तार बदल रहे हैं, इसमें 6 महीने लगेंगे
सरगुजा बिजली विभाग के ईई यशवंत शिलेदार ने बताया कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में खुले तार बदले जा रहे हैं। वहीं जहां हाइट कम है, वहां ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। 30 प्रतिशत जगहों पर काम हो चुका है, बाकी जगहों पर काम चल रहा है। दिसंबर तक काम पूरे हो जाएंगे।
बिजली विभाग को काम करना है
इसके साथ ही सरगुजा सीसीएफ वी माथेश्वरन ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर जहां तार झूल रहे हैं या खुले हैं, उसकी रिपोर्ट दे दी गई है। बिजली विभाग को इस पर काम करना है। कुछ दिन पहले ही मीटिंग में जल्द काम पूरा करने को कहा गया है।
