DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

राजस्थान में करंट लगने से 8 मजदूरों की मौत:झुंझुनूं में सड़क बनाते समय मशीन हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई, गांववालों का 7 घंटे बाद धरना खत्म

उदयपुरवाटी (झुंझुनूं), एजेंसी। राजस्थान के झुंझुनूं में सोमवार को सड़क बना रहे 8 मजदूरों की करंट लगने से मौत हो गई। 5 अन्य झुलस गए। हादसा उदयपुरवाटी के छापोली गांव में सुबह 10 बजे हुआ।

उदयपुरवाटी SHO रामपाल ने बताया- हादसा छापोली-कदंब कुंड मार्ग पर सीकर-नीमकाथाना स्टेट हाईवे से करीब 150 मीटर दूर हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। 7 घंटे बाद शाम 5 बजे मुआवजा और संविदा पर नौकरी के आश्वासन के बाद धरना खत्म कर दिया।

रोड़ी-बजरी मिलाने के काम में आने वाली मशीन ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई।

इससे उसमें करंट फैल गया। वहां काम कर रहे मजदूर करंट की चपेट में आ गए। हाईवोल्टेज लाइन का तार रोड़ी-बजरी (कंक्रीट) मिक्सर मशीन के हाइड्रोलिक जैक से टच हुआ था।

15-15 लाख मुआवजा और संविदा पर नौकरी देने पर सहमति

मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा- मृतकों के आश्रितों को अलग-अलग योजनाओं में 15 लाख मुआवजा और एक-एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने पर सहमति बनी है। विकास अधिकारी और तहसीलदार को राजस्थान और केंद्र सरकार की योजनाओं में लाभ देने के लिए कहा है। वन विभाग की जमीन पर बन रहे इस रास्ते को लेकर झुंझुनूं के डीएफओ को निर्देश दिए है कि संबंधित जनप्रतिनिधि से संपर्क कर रास्ते के डायवर्जन के प्रस्ताव को पोर्टल पर अपलोड करें। बातचीत के बाद परिजन शव लेने को तैयार हो गए और धरना खत्म कर दिया।

मंत्री खर्रा बोले- वन विभाग की जमीन पर बिना प्रस्ताव बन रही थी सड़क

सड़क का निर्माण सरकारी की योजना में नहीं हो रहा था। चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने सार्वजनिक तौर पर अपने स्तर पर यह निर्माण करने का निर्णय लिया होगा। ये वन विभाग की जमीन पर सड़क बन रही थी। ये मुख्य रास्ता होता तो लोग पंचायत के मार्फत या व्यक्तिगत स्तर पर डायवर्जन के प्रस्ताव भिजवाते तो यह हादसा ही नहीं होता। हादसे के कारणों की जांच चल रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

धार्मिक स्थान पर रास्ता जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा-इस देश में सबसे बड़ी समस्या ये है कि नियमों के हिसाब से कोई नहीं चलना चाहता है। सालों पुराना रास्ता है तो प्रस्ताव जाता तो कभी भी डायवर्जन हो सकता था। रास्ता सरकार के स्तर पर भी बन सकता था।

पूर्व मंत्री बोले- हर परिवार को 20-25 लाख की सहायता देनी चाहिए

पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कहा- मरने वाले लोग बहुत गरीब परिवार से हैं। ये पॉइंट हादसों का है। यहां 7-8 लोग हर साल मर जाते हैं। मेरी मुख्यमंत्री से बात हुई है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी यहां आए हैं। कलेक्टर-एसपी भी मौजूद है। मेरी सरकार से विनती है कि नियमों से हटकर कम से कम प्रति परिवार को 20 से 25 लाख रुपए दिए जाने चाहिए।

पहले रास्ते से दूर थी 11KV लाइन, कुछ दिन पहले ही बदली

हादसे के बाद ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। ग्रामीण रोहिताश्व ने बताया- 11KV की लाइन पहले रास्ते से दूर थी, लेकिन कुछ दिन पहले इस लाइन को बदलकर रास्ते के ऊपर से लिया गया था। तार नीचे होने के कारण ये बड़ा हादसा हो गया।

आरसीसी डालने का काम करता था ठेकेदार विष्णु

ग्रामीणों ने बताया- जन सहयोग से सड़क बनाई जा रही थी। करीब तीन-चार महीने से काम चल रहा था, जो बीच बीच में रुक जाता था। गांव का ठेकेदार विष्णु सैनी आरसीसी डालने का काम करता था। ग्रामीणों के कहने पर उसने सोमवार को काम फिर से शुरू किया था।

ग्रामीण बोले- सरकार इस गांव के लिए मर चुकी है

ग्रामीण अविनाश ने बताया- इस काम को बार-बार रोका गया। सरकार इस गांव के लिए मर चुकी है, चाहे कोई भी काम हो। इस काम के लिए गांव वालों ने पैसा इकट्ठा किया था। इसके बाद भी सरकारी अधिकारियों और नेताओं ने 2 बार काम बंद करवाया था। हाथा-जोड़ी कर फिर से काम शुरू करवाया था।

जिला कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे

हादसे की जानकारी मिलने पर झुंझुनूं कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग, एसपी कावेंद्र सिह सागर, विधायक भगवानाराम सैनी, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, गुर्जर नेता रविंद्र सिंह भडाना सहित कई लोग मौके पर पहुंचे।

Exit mobile version