नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक बड़ी उम्मीद बन चुका है। जैसे-जैसे समयसीमा नजदीक आ रही है, सरकारी गलियारों में सैलरी बढ़ोतरी और एरियर (Arrears) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सबसे अधिक उत्साह उन कर्मचारियों में है जिनकी बेसिक सैलरी रू.50,000 से कम है, क्योंकि नए फिटमेंट फैक्टर के लागू होते ही उनकी झोली में लाखों का एरियर गिरने की संभावना है।
फिटमेंट फैक्टर: वेतन वृद्धि की असली चाबी
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘फिटमेंट फैक्टर’ है। यही वह गुणांक (multiplier) है जो तय करता है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी में कितनी शुद्ध वृद्धि होगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत यह 2.57 है, लेकिन कर्मचारी संगठनों की मांग इसे और ऊपर ले जाने की है।

कर्मचारी यूनियनों की मांग: FNPO और AIDEF जैसे संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को 3.0 से 3.25 के बीच रखा जाना चाहिए। यूनियनों का प्रस्ताव है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार के 3 सदस्यों के बजाय 5 सदस्यों के खर्च को मानक माना जाए। हालांकि सरकार ने अभी पत्तों नहीं खोले हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अंतिम फैसले में अभी करीब एक साल का वक्त लग सकता है।
एरियर का गणित: कब और कितना मिलेगा पैसा?
चूंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रहा है। नियमानुसार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। यदि आयोग के गठन और कार्यान्वयन में देरी होती है, तो कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2026 से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक का पूरा एरियर दिया जाएगा। यदि यह देरी 20 महीने तक खिंचती है, तो एरियर की राशि एकमुश्त जैकपॉट साबित हो सकती है।
लेवल-8 कर्मचारियों के लिए ‘लॉटरी’ जैसा मौका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रू.50,000 से कम बेसिक सैलरी वाले (विशेषकर लेवल-8) कर्मचारियों को सबसे बड़ा वित्तीय लाभ मिल सकता है।
