मुंबई, एजेंसी। एक्टर इमरान खान ने ‘SIR’ विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा है कि वे भविष्य में इस तरह के किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट इमरान को मिलने लीव इंडिया नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कोर्ट ने उनसे बिना शर्त माफी और अंडरटेकिंग देने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत की याद दिलाई और निर्देश दिया कि इमरान को उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ (LIN) का जवाब देने के लिए कुछ समय दिया जाए।
अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। तब तक उनके खिलाफ जारी ‘लीव इंडिया’ (भारत छोड़ो) नोटिस पर रोक रहेगी।
एक्टर इमरान खान 42 साल से भारत में रह रहे हैं लेकिन उनके पास अमेरिका की नागरिकता है, 2006 से OCI कार्ड होल्डर हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट के कमेंट
- आप इतने सालों से भारत में रह रहे हैं, इस दौरान आपने कभी किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। फिर भी अब शामिल क्यों हुए।
- आप OCI होल्डर हैं, आप भारतीय नागरिक जैसे व्यवहार नहीं कर सकते, आप SIR से प्रभावित ही नहीं हैं, तो आपको प्रोटेस्ट का कोई हक नहीं।
- आप बचपन से यहां हैं तो भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई क्यों नहीं करते? अगर OCI ही रहना है तो अंडरटेकिंग देनी होगी कि दोबारा ऐसे प्रोटेस्ट में नहीं जाएंगे।
- इसके अलावा बिना शर्त माफी भी देनी होगी, क्योंकि आपने लोगों को उकसाया है। ये सेलिब्रिटी से अपेक्षित नहीं। आपकी रोजी-रोटी सब इसी देश से है।
चीफ जस्टिस बोले- ये भारत की उदारता, पहले नोटिस दिया
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि भारत की उदारता देखिए कि एक अमेरिकी नागरिक, जिसके पास ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है, उसे तुरंत देश से बाहर निकालने या डिपोर्ट करने के बजाय पहले एक नोटिस देकर देश छोड़ने के लिए कहा गया। अगर किसी भारतीय नागरिक ने विदेश में ऐसा ही कुछ किया होता, तो उसे अगली ही फ्लाइट से भारत वापस भेज दिया जाता।
इस केस में आगे क्या होगा…
एक्टर इमरान खान को अंतरिम प्रोटेक्शन मिल गया है। कोर्ट ने कहा है कि आप कहीं नहीं जा रहे हैं, न आपको फिलहाल देश छोड़ना है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी जवाब दाखिल करने कहा है।
इसके अलावा ‘फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस’ FRRO ने 17 अक्टूबर को इमरान का OCI कैंसल करने का अलग शो-कॉज नोटिस भी दिया था। इस मामले पर सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
1. OCI क्या है- ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया कार्ड विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए आजीवन वीजा जैसा कार्ड। लेकिन दोहरी नागरिकता नहीं है, भारत दोहरी नागरिकता नहीं देता।
2. कौन ले सकता है- स्वयं, माता-पिता/दादा-दादी 26 जनवरी 1950 के बाद भारतीय नागरिक रहे हों, पाकिस्तान/बांग्लादेश को छोड़कर। 2006 से PIO कार्ड को OCI में मर्ज कर दिया गया।
3. क्या अधिकार मिले हैं- बिना वीजा के आजीवन भारत आने-जाने की छूट, भारत में अनिश्चित काल तक रहने, पढ़ने, काम करने (कुछ क्षेत्रों को छोड़कर) की अनुमति, घर/प्रॉपर्टी की खरीदी, भारतीयों के बराबर आर्थिक-शैक्षणिक अधिकार।
4. क्या अधिकार नहीं मिलते- वोट डालने का हक नहीं। चुनाव लड़ने का हक नहीं। सरकारी नौकरी नहीं। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, जज, MP/MLA नहीं बन सकते। प्रोटेस्ट/राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते। भारत सरकार जब चाहे OCI कैंसल कर सकती है।
5. किन कामों पर पाबंदी- माउंटेनियरिंग, मिशनरी, पत्रकारिता, रिसर्च और कुछ विशेष क्षेत्रों में जाने के लिए परमिशन लेनी पड़ती है।
6.लीव इंडिया नोटिस क्या होता है- FRRO फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) विदेशी नागरिक को भारत छोड़ने का नोटिस दे सकता है। सरकार के पास “संप्रभु शक्ति” है – सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि लाइफटाइम वीजा होने पर भी विदेशी को रोका/निकाला जा सकता है।
7. OCI कैंसल कब हो सकता है- धोखे से OCI लेने पर। 5 साल में 2 साल से ज्यादा जेल की सजा होने पर। भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा के खिलाफ काम करने पर। विदेशी दुश्मन देश की मदद करने पर। भारत के कानून का उल्लंघन करने पर।
8. OCI से भारतीय नागरिकता कैसे लें- कम से कम 1 साल तक भारत में रहने के बाद नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकते हैं। 5 साल का OCI अनुभव चाहिए।
9. OCI को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी- OCI कार्ड धारक भारतीय नागरिक नहीं। आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) ही एकमात्र मौलिक अधिकार है जो विदेशी को भी मिलता है। बाकी सारे अधिकार – भाषण, प्रोटेस्ट, वोट – सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए हैं।

