मिर्जापुर,एजेंसी। हमारी जमीन चली गई, मुआवजा भी नहीं मिला। हमारे बच्चे इस प्लांट की वजह से आज भूखे मर रहे हैं। पहले अधिकारी कहते थे कि हर घर में नौकरी देंगे। अब कोई पूछने तक नहीं आता। दो वक्त खाने के भी पैसे नहीं बचे। यही हालत रही तो आत्महत्या करनी पड़ेगी। सरकार से मांग है कि या तो ये पावर प्लांट बंद हो या हमारी जमीन के पैसे दिए जाएं।’
40 साल की जड़ावती देवी मिर्जापुर के ददरी खुर्द गांव में रहती हैं। यहां बन रहे अडाणी ग्रुप के थर्मल पावर प्लांट को लेकर बहुत खफा हैं। उनकी तरह गांव के 120 लोग मिर्जापुर जिला प्रशासन के सामने खुद को जिंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं। यहां की मुसहर और बिंद कम्युनिटी प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है।
गांववालों का आरोप है कि ये थर्मल पावर प्लांट जिस जमीन पर बन रहा है, वहां 14 साल पहले उनके मकान थे। बंदूक और झूठे केस में फंसाने के डर से औने-पौने दाम देकर उनकी जमीनें हथिया ली गईं। इसे लेकर विवाद ये भी है कि प्लांट मड़िहान के जंगल के बीचोंबीच बनाया जा रहा है। इसे NGT से हरी झंडी नहीं मिली है।
हालांकि अडाणी ग्रुप का कहना है कि प्लांट के लिए हुआ लेन-देन पूरी तरह कानूनी है। इसे प्रशासन की सहमति और नियमों के अनुसार बनाया जा रहा है। अब जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वो सिर्फ गुंडागर्दी कर रहे हैं। 14 साल पहले लोगों ने अपनी जमीनें वेलस्पन कंपनी को बेची थी, अब वही प्रोजेक्ट हमारे अंडर है।
