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बोरे-बासी खाकर भूपेश बोले- ये हमारा अभिमान:जिला पंचायत अध्यक्ष ने मजदूरों के पैर धोए; कांग्रेसियों ने बोरे-बासी खाते हुए शेयर किए फोटो-वीडियो

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में आज 1 मई को कांग्रेस ‘बोरे-बासी दिवस’ के रूप में मजदूर दिवस मना रही है। नेता अपने घरों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन बोरे-बासी खाकर उसकी फोटो, वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। भूपेश बघेल ने भिलाई के संत विजय ऑडिटोरियम में बोरे-बासी खाकर तिहार मनाया।

दुर्ग जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे ने मनरेगा क्षेत्र पहुंचकर वहां मौजूद मजदूरों के पैर धोए और छत्तीसगढ़िया गमछा और माला पहनाकर उनका स्वागत किया।

दुर्ग जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे ने मनरेगा क्षेत्र पहुंचकर वहां मौजूद मजदूरों के पैर धोए।

दुर्ग जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे ने मनरेगा क्षेत्र पहुंचकर वहां मौजूद मजदूरों के पैर धोए।

बता ये परंपरा भूपेश बघेल की सरकार में शुरू हुई थी, जब मंत्रियों से लेकर कलेक्टर, IAS और IPS अधिकारियों तक ने बोरे-बासी खाते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस सरकार के बाद पिछले साल जब भाजपा की सरकार बनी, तब भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बोरे-बासी खाकर मजदूर दिवस की बधाई दी थी। उन्होंने रायपुर में श्रमिकों को सम्मानित भी किया था।

लेकिन इस बार उनके आधिकारिक शेड्यूल या कार्यक्रमों में बोरे-बासी दिवस को लेकर अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से न तो बोरे-बासी खाने का जिक्र हुआ है, न किसी आयोजन की सूचना दी गई है।

सुशील आनंद शुक्ला छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख ने बोरे बासी खाते हुए।

पिछले साल सीएम विष्णुदेव साय ने भी बोरे बासी खाया था।

भूपेश सरकार में बना था बड़ा सोशल मीडिया ट्रेंड

‘बोरे-बासी दिवस’ का चलन 2020 के बाद तब शुरू हुआ जब भूपेश बघेल सरकार में इसे व्यापक स्तर पर मनाया गया। यह एक तरह से सोशल मीडिया कैम्पेन था, जिसने बोरे-बासी को छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जोड़ दिया।

तब इसे बड़े सम्मान के साथ मनाया गया था और इसे मजदूरों के भोजन के प्रतीक के रूप में स्थापित करने की कोशिश हुई थी। इस दौरान तब न केवल मंत्री, विधायक बल्कि कलेक्टरों, IAS और IPS अधिकारियों तक ने बोरे-बासी खाते हुए अपनी तस्वीरें शेयर की थीं।

कांग्रेस नेता मोहन मरकाम भी बोरे-बासी खाते हुए, उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद।

कांग्रेस इसे बना रही अस्मिता का प्रतीक

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अब इसे राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और जड़ों से जोड़ रही है। कांग्रेस नेता कहते हैं कि ‘बोरे-बासी’ केवल खाना नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग की मेहनत और जीवनशैली का प्रतीक है। इसी वजह से हर साल 1 मई को इसे याद किया जाता है।

पार्टी नेताओं का दावा है कि प्रदेश की मिट्टी और संस्कृति से जुड़े इस पर्व को अब सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि लोग खुद अपनाने लगे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने बोरे-बासी खाते हुए फोटो शेयर की

भूपेश बघेल ने संत विजय ऑडिटोरियम, भिलाई में बोरे-बासी खाकर तिहार मनाया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बोरे बासी खाते हुए फोटो शेयर की है।

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने मिट्टी के बर्तन में बोरे-बासी खाते हुए।

पिछली सरकार में कई IAS और IPS ने बोरे-बासी खाते हुए फोटो शेयर की थी।

पिछली सरकार में मुख्यमंत्री के सचिव अंकित आनंद और एस भारती दासन ने बोरे-बासी खाकर फोटो शेयर की थी।

IAS निलेश क्षीरसागर ने भी सोशल मीडिया में तस्वीरें शेयर की थी।

IAS ऋचा प्रकाश चौधरी ने बोरे बासी खाकर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं दी थीं।

IAS तारण प्रकाश सिन्हा, IPS सदानंद कुमार ने भी बोरे बासी खाया था।

IAS सर्वेश्वर भूरे ने भी बोरे-बासी खाया था।

IPS संतोष सिंह ने परिवार संग बैठकर बोरे बासी खाया था।

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