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अग्निपथ से अब हैं पक्कापथ…

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वो चार साल की राह, अब छह साल का अवसर,

युवाओं के ख़्वाबों को मिला, उम्मीदोंभरा सफर।

अग्निपथ की तपती राहों पे, कितने अरमान चले,

देश रक्षा करने के खातिर, कितने नौजवान ढले।

कभी कहा था 25 प्रतिशत, शेष को जाना होगा,

चार साल की सेवा करके, नव रास्ता पाना होगा।

अब पक्की राह खुली है तो, चेहरे पे मुस्कान रहे,

मेहनत करनेवाले युवाओं, सपनों का सम्मान रहे।

वर्दी केवल कपड़ा नहीं है, यह गौरव की पहचान,

सीने में देशभक्ति का जज्बा, भारतीयों की शान।

सीमा पर डटे खड़े हैं, उनका भी तो अधिकार रहे,

सेवा बाद सुरक्षित “भविष्य” पक्का इंतजाम रहे।

पांचवें साल में बढ़े तनख्वाह छठे में नई उड़ान हो,

सैनिक के त्याग-तपस्या का, उचित मूल्यांकन हो।

सिर्फ घोषणा नहीं, धरातल पर “परिणाम” चाहिए,

हर युवा को अवसर मिले, ऐसा हिंदुस्तान चाहिए।

नियम बदलते तो सोच बदलें, नीयत में ईमान रहे,

भर्ती की हरेक प्रक्रिया में पारदर्शिता का मान रहे।

अग्निपथ हो या पक्कापथ, लक्ष्य एक ही सार रहे,

देश का युवा सशक्त बने और भारत का मान रहे।

संजय एम तराणेकर 

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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