मुंबई,एजेंसी। उद्धव और राज ठाकरे ने बुधवार को बृहन मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव एक साथ लड़ने का ऐलान किया। 20 साल बाद दोनों की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) और मनसे में चुनावी गठबंधन हुआ है।
इससे पहले 2005 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर मनसे पार्टी बनाई थी। दोनों ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारी सोच एक है अगर बंटेंगे तो बिखरेंगे। महाराष्ट्र के लिए हम सब एक हैं। इससे पहले दोनों नेता शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे के स्मारक पहुंचे और श्रद्धांजलि दी।
महाराष्ट्र में BMC समेत 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को वोटिंग होगी। 16 जनवरी को रिजल्ट आएगा।
दोनों नेताओं ने शिवाजी पार्क स्थित बालासाहेब ठाकरे के स्मारक पर श्रद्धांजलि भी दी।
उद्धव-राज ठाकरे की स्पीच, 2 बड़ी बातें…
- राज ठाकरे बोले- मुंबई का मेयर मराठी होगा: मैने एक बार कहा था कि हमारी आपसी किसी भी विवाद या लड़ाई से महाराष्ट्र बड़ा है। आज की बैठक के बाद हम अन्य नगर निगमों के लिए भी घोषणा करेंगे। मुंबई का मेयर मराठी ही होगा और वह हमारे दल से होगा।
- उद्धव ठाकरे बोले- बंटेंगे तो हम सब बिखर जाएंगे: मैं सभी से अनुरोध और अपील करता हूं कि पिछली विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसा दुष्प्रचार किया था। मैं मराठी लोगों से कहना चाहता हूं- अब अगर आपसे चूक हुई तो सब खत्म हो जाएगा। अब अगर हम बंटे तो पूरी तरह मिट जाएंगे। इसलिए न टूटें, न बंटें। मराठी अस्मिता की विरासत को न छोंड़ें।
आज गठबंधन का ऐलान
24 दिसंबर 2025: मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों ने गठबंधन का ऐलान किया। इस दौरान दोनों के परिवार भी मंच पर नजर आए।
5 महीने पहले गले मिले थे
5 जुलाई 2025: महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी एकता’ पर मुंबई के वर्ली डोम में रैली की थी।
20 साल पहले दूरी आई थी

27 नवंबर 2005: राज ने शिवसेना में उद्धव को उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। 2006 में अपनी अलग पार्टी मनसे बनाई थी।
उद्धव-राज के एकसाथ चुनाव लड़ने के मायने क्या हैं
BMC पर नियंत्रण की लड़ाई: BMC देश की सबसे अमीर नगर निगम है। लंबे समय तक शिवसेना का दबदबा रहा।साथ आने से उद्धव ठाकरे की खोई हुई राजनीतिक जमीन मजबूत हो सकती है।
मराठी वोटों का एकीकरण: अब तक शिवसेना (उद्धव गुट) और MNS (राज ठाकरे) के अलग-अलग रहने से मराठी वोट बंटते थे। अब मराठी वोट एकसाथ आ जाएगा। इसका सीधा असर BJP और कांग्रेस-NCP गठबंधन पर पड़ेगा
BJP के लिए चुनौती: BJP ने मुंबई में शहरी, गुजराती और उत्तर भारतीय वोटों में पकड़ बनाई है। ठाकरे भाइयों का साथ आना BJP के लिए सीधी सियासी चुनौती बन सकता है। खासकर मध्य मुंबई और मराठी बहुल इलाकों में।
शिंदे गुट पर दबाव: एकनाथ शिंदे गुट खुद को ‘असली शिवसेना’ बताता है। ठाकरे भाइयों की एकजुटता से शिंदे गुट की वैधता पर सवाल उठेगा और कैडर में असमंजस पैदा हो सकता है।
