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ऑनलाइन अटेंडेंस से नाराज शिक्षिका ने सरकार पर उठाए सवाल:वीडियो जारी कर बोली-पहले अधिकारियों का हिसाब ऑनलाइन हो, डीईओ बोले-जांच के बाद होगी कार्रवाई

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में एक शिक्षिका का ऑनलाइन अटेंडेंस के विरोध में बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शिक्षिका ने कहा कि जब शिक्षकों की ऐप से उपस्थिति और काम की निगरानी हो रही है, तो कलेक्टर से लेकर सभी अधिकारियों और मुख्यमंत्री की भी उपस्थिति और काम का हिसाब ऑनलाइन होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार वे हादसे का शिकार भी हो जाते हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को शिक्षकों पर निगरानी के बजाय दूसरे विभागों की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो अगले चुनाव में सरकार को जनता के जवाब के लिए तैयार रहना होगा।

शिक्षिका का वीडियो भी वायरल हो रहा है। वहीं, डीईओ ने वायरल वीडियो की जांच कराने और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है।

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक शिक्षिका का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में शिक्षिका ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम का विरोध करती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षकों की उपस्थिति और काम का हिसाब ऑनलाइन लिया जा रहा है, तो कलेक्टर से लेकर सभी अधिकारियों और यहां तक कि मुख्यमंत्री की भी उपस्थिति और काम का विवरण ऑनलाइन किया जाना चाहिए।

शिक्षिका ने अपना नाम निर्मला कोमल बताया है। 29 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट पर वीडियो बनाते हुए उन्होंने कहा कि वह ड्यूटी पर हैं। इसी दौरान उन्होंने ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

शिक्षिका का कहना है कि सरकार ने शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ऐप के जरिए अटेंडेंस इन और आउट की व्यवस्था शुरू की है। उनका आरोप है कि समय पर अटेंडेंस लगाने के चक्कर में शिक्षकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार शिक्षक रास्ते में हादसे का शिकार भी हो जाते हैं, लेकिन सरकार इस समस्या पर ध्यान नहीं देती।

वीडियो में शिक्षिका ने सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब शिक्षकों पर ऑनलाइन निगरानी रखी जा रही है, तो कलेक्टर समेत सभी अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति और उनके काम का विवरण भी ऑनलाइन होना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों और कामकाज को भी जनता के सामने सार्वजनिक करने की बात कही। शिक्षिका ने कहा कि शिक्षकों की ऐप के जरिए निगरानी बंद की जानी चाहिए, क्योंकि शिक्षक अपना काम जिम्मेदारी से कर रहे हैं। सरकार को अगर काम कराना है तो दूसरे विभागों की व्यवस्था सुधारने और सड़कों से मवेशियों को हटाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

शिक्षिका ने कहा कि वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो अगले चुनाव में जनता सरकार को जवाब दे सकती है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद जिले में तरह-तरह की चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा सवाल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्कूल समय में बच्चों को पढ़ाने के बजाय शिक्षक रील बना रहे हैं और वीडियो के जरिए सरकार और मुख्यमंत्री पर टिप्पणी कर रहे हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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