कोरबा। जैव विविधता दिवस पर कोरबा वनमंडल के 6 परिक्षेत्रों में वन अमले ने वन्यप्राणियों और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक करने महाभियान चलाया। ग्रामीणों को भी इसका हिस्सा बनाया और उन्हें जागरूक किया।
पसरखेत परिक्षेत्र के सघन और अतिसंवेदनशील इलाके में वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए वन अमले व एनजीओ ने मिलकर एंटी स्नेयर वॉक चलाया। शिकारियों के जाल से बेजुबान जंगली जानवरों को बचाने वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए चलाई गई मुहिम के दौरान शिकार के लिए बिछाए गए फंदों की खोजबीन की गई। शिकार के इरादे से जंगलों में दौड़ाए गए अवैध करंट प्रवाहित बिजली के तारों को ढूंढकर काटा गया।वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत कोरबा वन मंडल में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस अनूठे अंदाज में मनाया गया।

इस वर्ष की थीम वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना रहा। इसी के तहत वन मंडल के सभी छह परिक्षेत्र लेमरू, बालको, कोरबा, करतला, पसरखेत और कुदमुरा में जमीनी स्तर पर अनेक गतिविधियां चलाई गई। छिनकोना तालाब की सफाई कर प्लास्टिक मुक्त किया। करतला जनपद अध्यक्ष अशोका कंवर की उपस्थिति में बरमार तालाब में अभियान के तहत प्लास्टिक व हानिकारक खरपतवार को साफ किया। ग्रामीणों ने पर्यावरण रक्षा का संकल्प लिया। करतला के अधिकारियों ने लोगों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी व संवैधानिक दायित्वों की जानकारी दी।
एशियन ओपनबिल स्टॉर्क जैसे प्रवासी पक्षियों के आवासों को सुरक्षित रखने पर चर्चा की। औद्योगिक क्षेत्र के करीब होने से बालको का क्षेत्र भी संवेदनशील है। यहां वन्यजीवों के सुरक्षित विचरण पर परिचर्चा हुई। इसके साथ ही प्रसिद्ध केंटर पिकनिक स्पॉट में वन परिक्षेत्र अधिकारी और विभागीय स्टाफ ने स्थानीय लोगों के साथ मिल ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप स्वच्छता अभियान चलाया। कोरबा मुख्यालय समेत आसपास के क्षेत्रों में विलुप्त हो रहीं स्थानीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए लोगों को अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करने होंगे। महाभियान में परिक्षेत्र अधिकारियों, वन रक्षकों, वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों और ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर सफल बनाया।
हाथी-मानव द्वंद रोकने के उपायों की समीक्षाकी गई कुदमुरा परिक्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती हाथियों की सुरक्षा और मानव- वन्यजीव द्वंद्व को कम करना है। बैठक में इसके स्थानीय उपायों की समीक्षा की। इसके अलावा लबैद परिसर के जलाशय को ग्रामीणों की मदद से पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त किया, ताकि जलीय जीव सुरक्षित रह सकें। जंगल की आग से निपटने की रणनीति भी बनी। जैव विविधता के मामले में सबसे समृद्ध लेमरू में स्थानीय ग्रामीणों और वन प्रबंधन समितियों के साथ कार्यशाला हुई। वैश्विक पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने जंगलों और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने की सामूहिक शपथ ली।
