नई दिल्ली, एजेंसी। आशुतोष दीक्षित वायुसेना के नए प्रमुख होंगे। वह 31 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल का कार्यभार ग्रहण करेंगे। वह अभी वाइस एयर चीफ मार्शल हैं। उन्होंने 1 जुलाई 2026 को यह पदभार संभाला था।
आशुतोष दीक्षित कारगिल जंग में भी शामिल थे। उन्होंने फाइटर जेट से घुसपैठियों पर बम गिराए थे। वह 20 तरह की लड़ाकू विमान उड़ाने में माहिर हैं।

एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे
आशुतोष दीक्षित एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे। एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह 30 सितंबर 2024 को वायुसेना प्रमुख बने थे। वह 31 अक्टूबर को रिटायर्ड हो रहे हैं। वह ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन और फ्रंटलाइन एयर बेस की कमान भी संभाल चुके हैं।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित की यह फोटो वायुसेना ने 13 जुलाई 2026 को पोस्ट की थी। तब उन्होंने वाइस एयर चीफ मार्शल बनने के बाद अपनी पत्नी के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की थी।
एयर मार्शल दीक्षित ने 3500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी
एयर मार्शल दीक्षित को करीब 40 साल का सर्विस अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के अलग-अलग वर्जन, जगुआर, तेजस, हॉक, IL-78, AN-32, किरण, HPT-32 और एवरो जैसे कई विमानों को उड़ाया है। वे एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। उन्होंने अब तक 3500 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है।
उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप-इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों और सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लिया है। भारतीय वायुसेना में स्वदेशी LCA तेजस और दूसरे स्वदेशी विमान प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
एयर मार्शल दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को IAF की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसी साल 29 जून को एयर मार्शल दीक्षित को परम विशिष्ठ सेवा मेडल से सम्मानित किया था।
वायुसेना के टेस्टिंग पायलट हैं एयर मार्शल दीक्षित
आशुतोष दीक्षित वायुसेना में टेस्टिंग पायलट हैं। टेस्टिंग पायलट सबसे कुशल पायलट माने जाते हैं। इसका काम विमान को उसकी अंतिम सीमाओं तक ले जाकर टेस्ट करना होता है।
सेना की खेप में जब भी कोई नया विमान आता है उसे पहली बार टेस्टिंग पायलट ही आसमान में लेकर जाते हैं। उड़ान के दौरान विमान के कंट्रोल, स्थिरता और तकनीकी ग्लिच की जांच करते हैं।
विमान में लगे नए रडार, मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का कोऑर्डिनेशन को परखते हैं। किसी भी विमान को वायुसेना के बेड़े में शामिल करने के लिए हरी झंडी देते हैं।
वायुसेना में सैकड़ों घंटे उड़ान का अनुभव रखने वाले सीनियर पायलट को ही टेस्टिंग पायलट बनाया जाता है। इसके लिए एयरोस्पेस इंजीनियरिंग या साइंस, टेक, इंजीनियरिंग, मैथ्स की समझ जरूरी है।
इसकी परीक्षा में पायलट को वह विमान उड़ाने दिए जाते हैं, जो उसने पहले कभी न छुए हों। इन्हें वायुसेना का टॉप गन माना जाता है, क्योंकि ये रिस्क जोन में काम करते हैं।
