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अविमुक्तेश्वरानंद बोले- असली हिंदू नहीं हैं CM योगी:कहा- आवाज दबाने हिस्ट्रीशीटरों का इस्तेमाल कर रही रूलिंग पार्टी, हिंदुओं को बांटने वाला UGC नियम

बिलासपुर,एजेंसी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्होंने राजनीतिक दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे लगातार गौ रक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन सरकारें इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। आगे उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ असली हिंदू नहीं हैं।

उनकी आवाज को दबाने के लिए सत्तारूढ़ दल हिस्ट्रीशीटरों का सहारा ले रहे हैं। आवाज को सुनने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की जा रही है। अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी कानून के नए नियमों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी का नया कानून हिंदुओं को बांटने वाला है।

बिलासपुर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों पर गंभीर आरोप लगाए।

दरअसल, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक कार्यक्रम में शामिल होने बेमेतरा गए थे। वहां से लौटते समय बिलासपुर में उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर निशाना साधा। शंकराचार्य ने कहा कि उनकी आवाज को दबाने के लिए सत्तारूढ़ दल हिस्ट्रीशीटरों का सहारा ले रहे हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि वे लगातार गौ रक्षा की बात उठा रहे हैं, फिर भी सरकारें इस दिशा में ठोस कदम उठाने से बच रही है।

यूजीसी नियम को बताया राष्ट्रद्रोह

यूजीसी के नए नियम पर शंकराचार्य ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इसे ‘हिंदुओं को बांटने वाला’ और ‘राष्ट्रद्रोह’ करार दिया। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में इस कानून का क्रियान्वयन नहीं होना चाहिए।

सनातन धर्म पर टिप्पणी करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि इसे किसी बाहरी लोगों से खतरा नहीं, बल्कि अंदर ही मौजूद ‘कालनेमियों’ से खतरा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की नीयत केवल वोट हासिल करना है, हिंदुओं के हित में काम करने की मंशा नहीं दिखती।

शंकराचार्य बोले- योगी असली हिंदू नहीं

योगी आदित्यनाथ को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें 40 दिन का समय दिया गया था, फिर भी वे खुद को साबित नहीं कर पाए। इस आधार पर उन्होंने कहा कि वे ‘असली हिन्दू नहीं’ हैं।

सवर्ण वर्ग की आपत्तियां क्या हैं?

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ हो रहे विरोध का बड़ा हिस्सा सवर्ण छात्रों और शिक्षकों से जुड़ा है। उनकी मुख्य आपत्तियां 2 बिंदुओं पर केंद्रित हैं-

1. झूठे मामलों पर सजा का प्रावधान हटना: ड्राफ्ट नियमों में झूठी शिकायत दर्ज कराने पर दंड का प्रावधान था, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया। सवर्ण छात्रों का कहना है कि इससे फर्जी जातिगत भेदभाव के मामलों की बाढ़ आ सकती है, जिसका इस्तेमाल दबाव बनाने या बदले की भावना से किया जा सकता है।

2. जनरल कैटेगरी को सूची से बाहर रखना: नियमों में जातिगत भेदभाव के शिकार के रूप में केवल एससी, एसटी और ओबीसी का उल्लेख है। सवर्ण वर्ग का तर्क है कि इससे यह संदेश जाता है कि जातिगत भेदभाव करने वाला केवल जनरल कैटेगरी ही होता है, जबकि भेदभाव किसी भी वर्ग के साथ हो सकता है।

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