रायपुर/महासमुंद,एजेंसी। भारत मामला प्रोजेक्ट घोटाला केस में ED ने छत्तीसगढ़ के 9 ठिकानों पर रेड की है। रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा और महासमुंद में मेघ बसंत इलाके में स्थित व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास पर छापेमारी की है। हरमीत खनूजा के ससुर हरमीत चावला और एक करीबी के घर पर कार्रवाई जारी है।
जानकारी के मुताबिक CRPF जवानों के साथ ED की 10 सदस्यीय टीम 4 गाड़ियों में सुबह पहुंची। टीम हरमीत खनूजा की तहसीलदार पत्नी रविंदर कौर (रूबी) के पिता ट्रांसपोर्टर हरमीत सिंह चावला के पंजाबीपारा स्थित घर में जांच कर रही है। हरमीत सिंह चावला हरमीत खनूजा के ससुर हैं।
इसके साथ ही आर्यन होंडा एजेंसी के संचालक जसबीर बग्गा के मेघ बसंत कॉलोनी स्थित निवास पर गई है। आरोपियों के घरों में ED डिजिटल सबूत और दस्तावेजों की जांच कर रही है। घोटाले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है।
ED के मुताबिक भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान को लेकर गड़बड़ी हुई है। फिलहाल आरोपियों के ठिकानों के बाहर सुरक्षा बल तैनात हैं। किसी भी व्यक्ति को घर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं है।
लॉ विस्टा में हरमीत खनूजा के घर कार्रवाई जारी है। बाहर सुरक्षाबल तैनात हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर भुगतान घोटाले में हरमीत सिंह खनूजा मुख्य आरोपी और जमीन दलाल है। हरमीत खनूजा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर हरमीत सिंह चावला की बेटी तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी।
ईडी की छानबीन में आरोपी के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों कारोबारियों के घरों से अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ED की टीमें अभी भी डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जांच के दायरे में सरकारी अधिकारी भी
ED के मुताबिक भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में गड़बड़ियों में कई लोगों के नाम शामिल हैं। जांच के दायरे में कुछ निजी व्यक्तियों, उनके सहयोगियों, सरकारी अधिकारियों और जमीन मालिकों के ठिकाने शामिल किए गए हैं।
ईडी की कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा, सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े जमीन मालिक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मुआवजा वितरण में नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध लेन-देन को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
ये महासमुंद के जसबीर बग्गा का मकान है। यहां ED की छापेमारी जारी है।
कौन हैं हरमीत सिंह खनूजा
हरमीत सिंह खनूजा छत्तीसगढ़ के रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर से जुड़े भूमि क्षतिपूर्ति भुगतान घोटाले में नामजद एक भूमि दलाल/ एजेंट हैं। आरोप है कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को फर्जी तरीके से हासिल करने/बंटवाने में मदद की, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
उन्होंने कागजों में फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन (बदलाव) कर के मुआवजा प्राप्त किया और पैसा अलग खातों में ट्रांसफर किया। 25 अप्रैल 2025 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उनके खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
कैसे हुआ घोटाला ?
भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।
इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।
शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।
जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए
राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई।
अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है।
