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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1,000 अंक लुढ़का, रुपये में भी रिकॉर्ड गिरावट- जानें क्यों गिरी Stock Market

मुंबई, एजेंसी। मंगलवार दोपहर भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। इसका असर लगभग सभी सेक्टरों पर दिखाई दिया और बाजार में भारी बिकवाली शुरू हो गई।

दोपहर करीब 12:43 बजे तक BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,034 अंक से ज्यादा टूटकर 74,980 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं NSE निफ्टी50 भी करीब 290 अंक गिरकर 23,525 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार खुलने के बाद से ही दबाव बना रहा और दिन चढ़ने के साथ गिरावट और तेज होती गई।

रुपये में रिकॉर्ड गिरावट से बढ़ी चिंता

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.58 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि इससे आयात महंगा होने का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर भारत जैसे देश के लिए यह बड़ी चिंता है, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर रुपया महंगाई बढ़ा सकता है और विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने के लिए मजबूर कर सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार पर बड़ा असर डाला। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और अस्थिर संघर्ष-विराम की खबरों से तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम कम करना शुरू कर दिया।

IT सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट

मंगलवार को IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निफ्टी IT इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

Infosys के शेयर करीब 3.86% टूटे
Tata Consultancy Services में लगभग 3.94% की गिरावट आई
HCLTech करीब 3.87% नीचे आया
Tech Mahindra में 3.56% की कमजोरी रही
Wipro के शेयर भी 3% से ज्यादा टूट गए

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती, विदेशी कंपनियों द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती और डॉलर-रुपये में उतार-चढ़ाव ने IT कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

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