DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

बिहान की दीदियां बना रही हैं पारंपरिक आकर्षक राखियां

चावल, धान, गेहूँ, मूंग दाल, कोड़ी, तुलसी, रुद्राक्ष, मौली एवं रेशम के धागों से तैयार हो रही हैं पर्यावरण-अनुकूल राखियां

‘वोकल फॉर लोकल’ से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

कोरबा। रक्षाबंधन पर्व को लेकर जिले के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं में उत्साह का माहौल है। जनपद पंचायत कटघोरा के धवईपुर स्थित जननी महिला संकुल संगठन से जुड़ी आस्था एवं सरस्वती स्व-सहायता समूह की दीदियां प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों से आकर्षक, पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल राखियों का निर्माण कर रही हैं। इन राखियों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को भी नई पहचान दिला रही हैं।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल “वोकल फॉर लोकल” की भावना को साकार करते हुए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार की जा रही राखियों में चावल, धान, गेहूँ, मूंग दाल, कोड़ी, तुलसी, रुद्राक्ष, मौली धागा तथा रेशम के धागों का उपयोग किया जा रहा है। प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित ये राखियां आकर्षक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती हैं।

पिछले वर्ष आस्था एवं सरस्वती स्व-सहायता समूह ने राखी निर्माण एवं विक्रय के माध्यम से लगभग 25 हजार रुपये का व्यवसाय किया था। इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई, स्वरोजगार के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ा तथा आजीविका के नए अवसर भी सृजित हुए।

रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी दोनों समूहों ने बड़े पैमाने पर विभिन्न डिजाइनों एवं पारंपरिक थीम पर आधारित राखियों का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। महिलाओं का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में अधिक उत्पादन कर बेहतर विपणन के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार करना है।

इस पहल से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार हो रहे हैं और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला एवं संस्कृति को भी बढ़ावा मिल रहा है। समूह की महिलाओं में उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और सामूहिक कार्य की भावना निरंतर मजबूत हो रही है।

Exit mobile version