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हसदेव नदी पर चौथी रेल लाइन का पुल अंतिम चरण में, अक्टूबर में ट्रेन चलने की उम्मीद

जांजगीर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अति-व्यस्त बिलासपुर-झारसुगुड़ा रेल खंड पर ट्रेनों के भारी दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने के लिए चल रहे चौथी रेल लाइन के निर्माण कार्य ने अब रफ्तार पकड़ ली है। हसदेव नदी पर बन रहा नया विशाल रेलवे पुल निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नदी की जलधारा के बीच खड़े इस मेगा ब्रिज के तैयार होने से 205 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिला है।

हसदेव नदी पर बने पुराने पुलों के ठीक समानांतर नए चौथे ट्रैक के लिए विशालकाय पियर (पिलर्स) और उन पर स्टील गर्डर्स की लॉन्चिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में पुल के डेक पर ट्रैक बिछाने और फिनिशिंग के अंतिम चरण के कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड और स्थानीय स्तर पर सभी जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया चल रही है। लटिया से चांपा के बीच बचे हुए नॉन-इंटरलॉकिंग और ओएचई कार्यों को देखते हुए अक्टूबर 2026 के अंत तक इस पूरे प्रोजेक्ट के पूरी तरह मुकम्मल होने की संभावना है। इसके बाद कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी द्वारा इसका कड़ा सुरक्षा निरीक्षण किया जाएगा। हरी झंडी मिलते ही इस नए रूट पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।

क्या-क्या काम हो चुके हैं पूरे बिलासपुर से झारसुगुड़ा तक कुल 205 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन परियोजना के तहत अधिकांश हिस्सों में काम पूरा हो चुका है। इसमें रूट पर ट्रैक बिछाने से पहले की जाने वाली मिट्टी की भराई और भूमि समतलीकरण का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो गया है। पूरे स्ट्रेच में आने वाले सभी छोटे पुलों और सहायक संरचनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। बिलासपुर से झारसुगुड़ा तक रेल पटरियां बिछाने का कार्य संपन्न हो चुका है। अब इस रूट पर निर्माण सामग्री ढोने वाली छोटी ट्रॉली और गाड़ियां दौड़ने लगी हैं।

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