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कांकेर की मिट्टी से निकला देश को ब्रॉन्ज:अनिमेष का बचपन कांकेर की गलियों में बीता, पिता बने कोच, सेंट माइकल में पढ़ा ककहरा

कांकेर, एजेंसी। जापान के आइची नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराने वाले देश के स्टार स्प्रिंटर अनिमेष कुजूर की रफ्तार की जड़ें कांकेर से जुड़ी हैं। मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले में 41.06 सेकंड का नया नेशनल रिकॉर्ड बनाकर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले अनिमेष ने अपनी शुरुआती रफ्तार कांकेर के नरहरदेव मैदान की लाल मिट्टी पर ही हासिल की थी।

मूलतः जशपुर जिले के रहने वाले अनिमेष का बचपन कांकेर में बीता। पिता अमृत कुजूर और माता रीना कुजूर 11 वर्षों तक कांकेर पुलिस में पदस्थ रहे। पांचवीं तक सेंट माइकल स्कूल कांकेर में पढ़े अनिमेष बाद में सैनिक स्कूल अंबिकापुर चले गए। छुट्टियों में जब भी कांकेर आते, नरहरदेव मैदान में फुटबॉल खेलते। वर्ष 2020 में 12वीं पढ़ाई पूरी होते ही जब देश भर में लॉकडाउन लगा, तो अनिमेष कांकेर लौट आए। खेल गतिविधियां बंद थीं, कोई पेशेवर कोच उपलब्ध नहीं था।

कठिन दौर में पुलिस विभाग में पदस्थ पिता अमृत कुजूर खुद कोच बने। पिता के दिशा-निर्देश में अनिमेष ने नरहरदेव मैदान में घंटों पसीना बहाया। उसी दौरान खेल युवा कल्याण विभाग की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अनिमेष ने 5 स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल झटके। यहीं से प्रोफेशनल एथलेटिक्स कॅरियर की शुरुआत हुई।

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