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BSP में 10 हजार करोड़ का लोहा चोरी का दावा:विधायक रिकेश सेन ने की CBI जांच की मांग, जानें कब-किसकी गिरफ्तारी हुई

दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ की भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में हुई लोहा चोरी मामले में एक नया दावा किया जा रहा है। विधायक रिकेश सेन ने कहा कि प्लांट में पिछले 40 साल में करीब 10 हजार करोड़ रुपए का लोहा चोरी हुआ है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है।

MLA ने कहा कि करोड़ों का लोहा चुराने वाले आरोपी को CBI ही पकड़ सकती है, उन्होंने CBI जांच की मांग की। आरोप है कि इस मामले में कई बड़े जनप्रतिनिधि और बीएसपी-CISF के कुछ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

2 दिन पहले इस मामले में रसमड़ा फैक्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह की गिरफ्तारी की गई है। अब तक इस मामले में 21 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। जिनमें 3 जमानत पर बाहर हैं। 5 को अग्रिम जमानत मिल गई है।

पुलिस ने रसमड़ा फ्रैक्ट्री के एमडी और डायरेक्टर को 18 सितंबर को किया गिरफ्तार।

पुलिस ने रसमड़ा फ्रैक्ट्री के एमडी और डायरेक्टर को 18 सितंबर को किया गिरफ्तार।

40 साल में 10 हजार करोड़ का लोहा चोरी का दावा

विधायक रिकेश सेन ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि मामले में गिरफ्तार लोगों को एक महीने के अंदर ही जमानत मिल गई। हालांकि उन्होंने बताया कि पुलिस जमानत के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है, ताकि केस को और मजबूत किया जा सके।

उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल एक संदेही और आरोपी के आधार पर जांच कर रही है, लेकिन पिछले 40 साल में हुए करीब 10 हजार करोड़ रुपए के लोहा चोरी के मामले की पूरी जांच और आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।

विधायक रिकेश सेन ने 29 अगस्त को छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम को खुला पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने 12 बिंदुओं के जरिए पूरे मामले की जानकारी दी थी। पत्र में एक ट्रांसपोर्टर का भी जिक्र किया था। जो अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

कहां से जांच कहां तक पहुंची

इस मामले की शुरुआत BSP से चोरी किए गए करीब 250 टन लौह स्क्रैप की बरामदगी से हुई थी। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को चोरी करने के तरीके के बारे में भी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, BSP से निकलने वाले फ्लू डस्ट के वाहनों में चोरी का लोहा छिपाकर ले जाया जाता था। इसके लिए केन, मैग्नेटिक क्रेन और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता था।

28 मई 2026 से पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की। इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ मामले की कड़ियां जुड़ती गईं और आरोपियों की संख्या भी बढ़ती गई। आरोप है कि फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों में चोरी का स्क्रैप लोड किया जाता था। इसके अलावा मैग्नेटिक क्रेन से BSP का लोहा फ्लू डस्ट वाले वाहनों में लोड किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

16 जून को संजय सिंह और पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने संजय सिंह को इस मामले का कथित मास्टरमाइंड बताया है।

इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर जांच शुरू की कि चोरी किया गया लोहा कहां-कहां भेजा जा रहा था और इसे कौन खरीद रहा था। इसी दौरान विधायक रिकेश सेन ने रसमड़ा की फैक्ट्री को लेकर सवाल उठाए थे।

इसके बाद पुलिस ने रसमड़ा की फैक्ट्री की भूमिका की भी जांच की। पुलिस के मुताबिक, जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद 18 सितंबर को रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया।

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