सहारनपुर, एजेंसी। यूपी में सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में 70 साल पुरानी मस्जिद पूरी तरह से ढहा दी गई। शनिवार तड़के 4 बजे से 6 बुलडोजरों ने 12 घंटे तक मस्जिद गिराई। एहतियात के तौर पर 5 कंपनी PAC, RAF और पुलिस के 200 जवान तैनात हैं। अब मलबा हटाने का काम चल रहा है। प्रशासन के मुताबिक, मलबा पूरी तरह हटाने में तीन से चार घंटे लग सकते हैं।
यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश पर हो रही है। कोर्ट ने मस्जिद को अवैध बताया था। इससे पहले, शुक्रवार रात 11 बजे अफवाह फैली कि प्रशासन मस्जिद को तोड़ने जा रहा है। इसके बाद भारी भीड़ जुट गई थी। तुरंत ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। लोगों को हटाया।
कार्रवाई के खिलाफ सहारनपुर आ रहीं कैराना सांसद इकरा हसन को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा कि सच्चा हिंदू कभी दूसरे धर्म का अपमान नहीं कर सकता। ये इसलिए हो रहा है, क्योंकि भगवान राम के मंदिर में चोरी करते हुए पकड़े गए हैं।
AIMIM चीफ असदुद्दीन आवैसी ने कहा कि क्या मुसलमानों के लिए अब मजहबी आजादी का संवैधानिक हक भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है? बसपा सुप्रीमो मायावती ने सरकार से तुरंत कार्रवाई रुकवाने की अपील की है।
शुक्रवार रात में कैराना से सहारनपुर आ रहीं इकरा हसन को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया।
6 बुलडोजर मस्जिद को तोड़ने में जुटे हैं। एक हिस्सा ढहाया जा चुका है।
70 साल पुरानी मस्जिद 3000 स्क्वायर फीट में बनी हुई थी।
20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले पर स्टे देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई। 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी।
मस्जिद 3300 स्क्वायर फीट में बनी हुई थी। दो मंजिला मस्जिद में 2 बड़े हॉल समेत 5 कमरे थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे। पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। कमरे में डाकघर चलता था।
10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद को अवैध बताते हुए डीएम से शिकायत की थी। मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए। जांच में मस्जिद अवैध पाई गई।
24 मार्च, 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की। 16 जुलाई, 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध माना और उसे हटाने के साथ 6.41 करोड़ रुपए की हर्जाना वसूलने का आदेश दिया। कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया।
