नई दिल्ली, एजेंसी। लगातार तीन महीने तक अधिशेष में रहने के बाद देश की बैंकिंग व्यवस्था में एक बार फिर नकदी घाटे की स्थिति में पहुंच गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार सोमवार को शुद्ध नकदी की स्थिति 19,971 करोड़ रुपए घाटे में रही। 22 मार्च के बाद यह पहली बार है जब बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी निगेटिव हुई है।

नकदी की कमी का असर मनी मार्केट पर भी दिखाई दिया। मौद्रिक नीति के परिचालन लक्ष्य माने जाने वाले भारित औसत कॉल दर (WACR) में बढ़ोतरी हुई और यह सोमवार के 5.33 प्रतिशत से बढ़कर मंगलवार को 5.38 प्रतिशत पर पहुंच गई।
लिक्विडिटी संकट को कम करने के लिए RBI ने मंगलवार को 7-दिवसीय वैरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के जरिए बैंकिंग प्रणाली में 1.41 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराई। इस व्यवस्था के तहत बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले बाजार आधारित दरों पर केंद्रीय बैंक से धन उधार ले सकते हैं।
बाजार सहभागियों ने कहा कि नकदी की तंगी काफी हद तक तिमाही के अंत में अग्रिम कर भुगतान के कारण थी, जिससे सरकार के कैश बैलेंस में तेज वृद्धि हुई और बैंकिंग प्रणाली से धन की निकासी हुई। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘नकदी की कमी मुख्य रूप से अग्रिम कर और अधिक मुद्रा निकासी की वजह से हुई है। जैसे जैसे महीने के अंत तक सरकारी खर्च में तेजी आएगी, नकदी अधिशेष की स्थिति में वापस आ जानी चाहिए।’ मुद्रा की निकासी ने भी तंगी में योगदान दिया। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में नकद निकासी अधिक रही है।
