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CCI ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ शिकायत खारिज की

नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के खिलाफ दायर शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के आरोप अनुमान आधारित हैं तथा इसके लिए कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। प्रतिस्पर्धा आयोग ने बृहस्पतिवार को जारी आदेश में कहा कि उसने विभिन्न क्षेत्रों की 4,500 से अधिक कंपनियों के खिलाफ लगाए गए ऐसे ही आरोपों को भी खारिज कर दिया है। 

शिकायतकर्ता ने दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) खरीद, ऊर्जा, दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) और स्वास्थ्य सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा तीन और चार के उल्लंघन का आरोप लगाया था। धारा तीन और चार क्रमशः प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और प्रभुत्व के दुरुपयोग से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन कंपनियों ने माल ढुलाई एवं आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में मूल्य निर्धारण में समानता, प्रतिस्पर्धियों को बाहर रखने वाली गतिविधियों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को सीमित करने जैसे समन्वित आचरण अपनाए हैं। 

साथ ही उसने महानिदेशक (डीजी) से मामले की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया था। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता विपक्षी पक्षों की विशिष्ट भूमिका बताने या आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराने में विफल रहा। सीसीआई ने कहा कि मिलीभगत या समन्वित आचरण के दावों के समर्थन में माल ढुलाई के भाव, चालान, निविदा दस्तावेज या पत्राचार जैसे कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। दूरसंचार क्षेत्र के मामले में आयोग ने कहा कि अल्पाधिकार वाले बाजार में ‘प्रीपेड टैरिफ’ योजनाओं, उनकी वैधता अवधि या रिचार्ज राशि में समानता मात्र से प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 

जीईएम खरीद से जुड़े आरोपों पर आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने न तो कथित रूप से बोली में हेराफेरी में शामिल कंपनियों की पहचान की और न ही समन्वय, सूचनाओं के आदान-प्रदान या बारी-बारी से बोली लगाने के संबंध में कोई सामग्री उपलब्ध कराई। आयोग ने कहा कि आरोपों में बुनियादी तथ्यों का अभाव है और उनके आधार पर व्यापक एवं साक्ष्य तलाशने के उद्देश्य से की जाने वाली जांच को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए विपक्षी पक्षों (रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड एवं अन्य) के खिलाफ अधिनियम की धारा तीन और चार के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। 

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