मुंबई, एजेंसी। अगर आप घर बनाने का सोच रहे हैं तो यह खबर आपको झटका दे सकती है। पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध का असर अब भारत के सीमेंट उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। तेल और गैस के बाद अब प्लास्टिक और पैकेजिंग सेक्टर में लागत बढ़ने से सीमेंट कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। UltraTech Cement समेत कई कंपनियों का कहना है कि प्लास्टिक पैकेजिंग बैग्स महंगे होने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले समय में सीमेंट की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
अल्ट्राटेक सीमेंट के मुख्य वित्तीय अधिकारी अतुल डागा ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के चलते पॉलिमर और प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। सप्लाई चेन में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनकी लागत करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि मार्च तिमाही में कंपनी को केवल पैकेजिंग बैग्स पर लगभग 90 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ी। हालांकि बैग्स की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है लेकिन उनकी कीमतों में आई तेजी ने लागत दबाव बढ़ा दिया है।
150 सप्लायर्स देते हैं बैग
डागा ने बताया कि बैग्स को लेकर कंपनी देशभर में करीब 150 सप्लायर्स के साथ काम करती है, जिससे बड़े पैमाने पर खरीदारी के कारण उसकी बारगेनिंग पावर मजबूत रहती है। बढ़ती लागत से निपटने के लिए कंपनी अब लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
मार्च में बढ़े थे सीमेंट के दाम
कंपनी ने यह भी कहा कि ईंधन और मालभाड़े की लागत में बढ़ोतरी का असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है लेकिन आने वाले समय में इसका दबाव और बढ़ सकता है। मार्च तिमाही में सीमेंट की कीमतें पहले ही बढ़ाई जा चुकी हैं और आगे हालात के अनुसार नए फैसले लिए जा सकते हैं।
अल्ट्राटेक सीमेंट ने वित्तवर्ष 2027-28 तक उत्पादन क्षमता 24 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी हर साल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए के निवेश की योजना पर काम कर रही है। कंपनी को आने वाले वर्षों में दहाई अंक की वृद्धि की उम्मीद है।
