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चंपत बोले-चुनाव के चलते चढ़ावा चोरी की FIR नहीं कराई:नृपेंद्र मिश्रा ने 14 इंटरव्यू किसके इशारे पर दिए, असली भेदिया कौन? डायरी में खुलासे किए

अयोध्या, एजेंसी। राम मंदिर के पूर्व महासचिव चंपत राय की डायरी की चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, डायरी में उन्होंने लिखा है कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के तुरंत बाद FIR इसलिए नहीं कराई, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि जांच में मामला लंबा खिंच सकता है। इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। कहा- उन्होंने मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में चढ़ावा चोरी को डकैती करार दिया। इससे समाज में गलत संदेश गया। इसलिए एक संत ने मुझसे बातचीत के दौरान नृपेंद्र मिश्र को खलनायक कहा था।

चंपत राय ने डायरी में सवाल उठाए हैं कि नृपेंद्र मिश्रा जैसे अनुभवी व्यक्ति ने चार दिनों में 14 चैनलों से बातचीत क्यों और किसके इशारे पर की। उन्होंने पिछले 6 साल में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों के दौरान व्यवस्थाओं या हिसाब-किताब पर कभी चर्चा नहीं की, तो अब इन पर बोलने का उनको क्या अधिकार है।

चंपत राय ने लिखा है कि अखिलेश यादव तक यह बात किस माध्यम से और किसने पहुंचाई। असली भेदिया कौन है? मेरे सामने सबसे बड़ा प्रश्न है। इसका पता लगना चाहिए।

तस्वीर 4 अगस्त की है। चंपत राय चढ़ावा चोरी सामने आने के 2 महीने बाद दिखे थे।

चंपत ने लिखा- नृपेंद्र मिश्रा को बताई थी पूरी बात

डायरी के अनुसार, 7 जून को चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के अगले दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NBCC) के पूर्व चेयरमैन अनूप कुमार अयोध्या पहुंचे थे। करीब 2 घंटे तक बातचीत हुई।

मैंने, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव ने घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी। नृपेंद्र मिश्र ने पूछा कि पुलिस में FIR क्यों नहीं कराई गई। इस पर मैंने उनसे कहा कि अगर पुलिस को मामला सौंप दिया जाता तो पूछताछ और कार्रवाई के सभी अधिकार पुलिस के पास चले जाते। उसका क्या परिणाम होगा, यह कहना मुश्किल था।

संतों को भी दी गई मामले की जानकारी

बैठक के बाद मैंने कई संतों से फोन पर बात की। उन्हें चढ़ावा चोरी के बारे में जानकारी दी। संतों को अयोध्या भी बुलाया। मंदिर परिसर के शेषावतार मंदिर में उनके साथ बैठक की। उन्होंने खबरों को निराधार बताते हुए संतों से उन पर ध्यान नहीं देने की अपील की।

संतों ने उनकी बात स्वीकार की। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से संत शामिल हुए थे, इसका जिक्र नहीं है। चंपत राय ने लिखा कि मामला सामने आने के बाद 3 दिनों तक 11-11 घंटे बैठकर चढ़ावा चोरी का काफी हिस्सा मैंने वापस प्राप्त किया।

तबीयत खराब होने के बाद भी भैयाजी जोशी से मिलने लखनऊ पहुंचा

डायरी के अनुसार, 9 जून को मेरी तबीयत खराब थी। इसके बावजूद मैं 10 घंटे मंदिर परिसर के पीएफसी भवन में बैठा रहा। 10 जून को मैं बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था। उसी रात गोपाल राव को भैयाजी जोशी का फोन आया। मुझे, अनिल और गोपाल को 11 जून की शाम तक लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया। गोपाल राव ने मेरी तबीयत खराब होने की बात कही। इस पर मैंने कहा कि मैं भी लखनऊ जाऊंगा, ताकि मामले से जुड़ी सभी बातें सही रूप में सामने आ सकें। हम तीनों लखनऊ गए। भैयाजी जोशी से मुलाकात की।

5 दिन पहले नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने कहा था- चंपत राय मेरी आचोलन नहीं कर सकते हैं।

नृपेंद्र मिश्रा ने अचानक अयोध्या का टिकट क्यों कैंसिल किया?

चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्र को 6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक के लिए अयोध्या आना था। प्लेन का टिकट भी बुक हो चुका था। उन्हें रिसीव करने के लिए ड्राइवर राधेश्याम को भी सूचना दी गई थी, लेकिन 4 जुलाई को अचानक उनकी यात्रा रद्द होने का संदेश आया। वह बैठक में नहीं पहुंचे। चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र क्यों नहीं आए, यह भी सवाल है।

नृपेंद्र मिश्रा के बयानों में बदलाव क्यों आया?

डायरी में चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र के मीडिया में दिए बयानों का भी जिक्र किया। शुरुआत में उन्होंने कहा- उनका दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित है, लेकिन बाद में उनके बयानों में बदलाव आया। 23 जून के बाद नृपेंद्र मिश्र के बयान आने बंद हो गए।

डायरी में उन्होंने लिखा कि इसका कारण तलाशना होगा। 14 जुलाई को मैंने अनूप मित्तल से 2 घंटे तक मुलाकात की। मैंने उनसे कहा कि संत मुझसे पूछ रहे थे कि क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। संत के सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था। इसलिए मैं आपको मामले की जानकारी दे रहा हूं।

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