जगदलपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के नक्सलियों की जड़ें अब देश के अंदर तक सीमित नहीं रहीं। बस्तर के अबूझमाड़ से निकलकर तुर्की तक जा पहुंची है। हाल ही में एनकाउंटर में मारे गए नक्सली संगठन के महासचिव बसवा राजू को तुर्की में श्रद्धांजलि दी गई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो में दिख रहा है कि तुर्की के वामपंथी संगठन के लीडर्स के चेहरों पर नकाब बंधे हैं, जिसमें वह भारत सरकार, बीजेपी और RSS का विरोध कर रहे हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो तुर्की से जारी किया गया है और तुर्की में ही श्रद्धांजलि दी गई है।
इसके पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान को न सिर्फ सपोर्ट किया, बल्कि उसे हथियार और ड्रोन भी सप्लाई किए थे। वहीं वीडियो को लेकर बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि तुर्की के वामपंथी उग्रवादी संगठनों द्वारा जारी वीडियो की प्रामाणिकता और मौलिकता जांच का विषय है।
बसवाराजू को तुर्की में श्रद्धांजलि देने से जुड़ी तस्वीरें देखिए
तुर्की के वामपंथी ग्रुप के लीडर ने कागज पर पढ़ते हुए एक वीडियो जारी किया।
तुर्की के वामपंथी ग्रुप के लीडर ने चेहरे पर नकाब बांधकर बसवा राजू को श्रद्धांजलि देते हुए वीडियो।
मारे गए नक्सल लीडर बसवाराजू को तुर्की में श्रद्धांजलि दी गई है। इसे लेकर वीडियो जारी किया गया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तुर्किये बोला था- यह पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन
तुर्की के राजदूत ने विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात कर पाकिस्तान के साथ एकजुटता दोहराई थी। तुर्की के राजदूत ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन माना और निर्दोष लोगों की मौत पर शोक जताया था।
तुर्की ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के आधार पर हल किया जाना चाहिए। वहीं, तुर्किये के विदेश मंत्री हकान फिदान ने भी पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री मुहम्मद इशाक डार को फोन कर एकजुटता जाहिर की थी।
21 मई 2025 को मारा गया था बसवाराजू
दरसअल, 21 मई 2025 को बस्तर के अबूझमाड़ में नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर कोंडागांव की DRG ने नक्सल संगठन के महासचिव और पोलित ब्यूरो मेंबर बसवा राजू समेत 28 नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर किया था।
DRG ने मौके से बसवा राजू समेत 27 नक्सलियों की लाश बरामद की थी, जबकि एक शव नक्सली अपने साथ लेकर चले गए थे। बसवा राजू पर देशभर में कुल 10 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। ये नक्सल संगठन का पहला सबसे बड़े कैडर का नक्सली था, जिसको मुठभेड़ में ढेर किया गया है।
