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20 फीट सीढ़ी चढ़कर रोज स्कूल जाते हैं बच्चे:गरियाबंद में 6 साल से पुल अधूरा, NHRC ने CS से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

गरियाबंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अधूरे पुल से स्कूली बच्चों के नदी पार करने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने एक्शन लिया है। NHRC ने इसे बच्चों की सुरक्षा और मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मामला माना है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अफसरों ने इलाके का दौरा किया। इसके बाद सेतु शाखा के अफसरों ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर सेंटरिंग प्लेट से सीढ़ी बनवा दी। हालांकि, इससे बच्चों के लिए नदी पार करने की मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। मामला मैनपुर ब्लॉक के ग्राम खामभाठा का है।

करीब 300 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण कार्य पिछले 6 साल से चल रहा है, लेकिन यह अभी भी अधूरा है। अधिकारियों ने करीब एक साल पहले ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि पुल 6 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं, अब ठेका कंपनी को निर्माण पूरा करने की मियाद एक बार फिर बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दी गई है।

अफसरों ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर सेंटिंग प्लेट की सीढ़ी बनवा दी है।

अफसरों ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर सेंटिंग प्लेट की सीढ़ी बनवा दी है।

NHRC ने अपने अधिकारिक वेबसाइड पर प्रेस रिलीज जारी किया है।

5.66 करोड़ की लागत से बनना था 90 मीटर पुल

पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा और खामभाठा गांव के बीच पैरी नदी बहती है। खामभाठा समेत तीन से ज्यादा गांवों के लोगों की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने साल 2021 में पैरी नदी पर 90 मीटर पुलिया निर्माण के लिए 5 करोड़ 66 लाख रुपए की मंजूरी दी थी।

साल 2023 में पुल निर्माण को तकनीकी स्वीकृति मिली थी और इसे साल 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पिछले साल से पुल अधूरा पड़ा है। ऐसे में ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर आना जाना करने को मजबूर हैं।

30 से ज्यादा बच्चे जोखिम उठाकर पहुंचते हैं स्कूल

ग्रामीणों ने बताया कि 30 से ज्यादा स्कूली बच्चों को देहारगुड़ा स्कूल पहुंचने के लिए अधूरे पुल से होकर गुजरना पड़ता है। उनको भी रोजाना पंचायत मुख्यालय और ब्लॉक मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।

बारिश के दौरान पैरी नदी का बहाव तेज होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों को करीब 20 फीट की सीढ़ी चढ़कर अधूरे पुल पर पहुंचना पड़ता है। इसके बाद पुल पर बिछाई गई सेंटरिंग प्लेट और प्लाई के सहारे जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।

दोनों ओर गहरी खाई है और पुल से निकले सरिए हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं।

दोनों ओर गहरी खाई और निकले सरिए

अधूरे पुल पर स्लैब जोड़ने के लिए सेंटरिंग प्लेट और प्लाई बिछाई गई है। दोनों ओर गहरी खाई है और पुल से निकले सरिए हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं।

छोटे बच्चों को उनके पेरेंट्स नदी और पुल पार कराने के लिए साथ पहुंचते हैं। वहीं, मिडिल स्कूल के प्रिसिंपल चित्रसेन पटेल ने बताया कि छुट्टी के समय स्कूल प्रबंधन की ओर से सहयोगियों की एक टोली बच्चों को सुरक्षित पुल पार कराने के लिए तैनात रहती है।

गांव से बाहर छोड़ना पड़ता है वाहन

स्कूली बच्चों के अलावा ग्रामीणों को भी पूरी बरसात इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। खामभाठा गांव में दुपहिया और चार पहिया वाहन रखने वाले ग्रामीणों को अपने वाहन पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा में छोड़ने पड़ते हैं।

बच्चों को 20 फीट की सीढ़ी लगाकर अधूरे पुल को पार करना पड़ता है।

कंपनी को 70 फीसदी राशि का भुगतान

पुल निर्माण का ठेका लोक निर्माण विभाग की सेतु शाखा ने बिलासपुर की कंपनी मेसर्स नटराज इंफ्रा बिल्डकॉन को दिया था। विभाग अब तक ठेका कंपनी को करीब 70 फीसदी राशि का भुगतान कर चुका है।

विभाग का दावा है कि निर्माण में देरी को देखते हुए कंपनी पर दो बार पेनाल्टी लगाई गई है और उसे काम पूरा करने के लिए एक्सटेंशन दिया गया है।

जून 2026 तक पूरा होना था काम

कांग्रेस के जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि आखिर एक्सटेंशन के मुताबिक पुल का काम जून 2026 तक पूरा होना था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण अधूरा पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग कंपनी की लापरवाही पर पर्दा डालने में लगा है।

विभाग का दावा- 70 फीसदी काम पूरा

सेतु शाखा के इंजीनियर फागूलाल रात्रे ने बताया कि पुल का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अभी केवल एप्रोच का काम बाकी है। बारिश खत्म होने के बाद जल्द ही बाकी काम पूरा कराया जाएगा।

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