नई दिल्ली ,एजेंसी। चीन ने हाल ही में होतान प्रांत में दो नए काउंटी बनाने की घोषणा की है, जो भारत के लद्दाख क्षेत्र की भूमि को शामिल करती है। इसके विरोध में भारत ने चीन से औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है और क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का पुनः प्रमाण दिया है। साथ ही, भारत ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग त्सांगपो) नदी पर बनने वाले मेगाहाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं, जो अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर बहती है। भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि चीन ने लद्दाख के पास हमारी भूमि पर अवैध और जबरन कब्ज़ा कर लिया है। उन्होंने दो नए काउंटी भी बनाए हैं। भारत ने इसका ठोस विरोध दर्ज कराया है।
भारत ने चीन के होतान प्रांत में He’an काउंटी और Hekang काउंटी के गठन पर “गंभीर विरोध” दर्ज कराया है, जिनमें लद्दाख के भारतीय क्षेत्र को शामिल किया गया है। ये काउंटी चीन के शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में बनाई गई हैं, जो भारत के अनुसार उसकी संप्रभुता में हैं। भारत का यह विरोध 27 दिसंबर 2024 को चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा रिपोर्ट किए गए बयान के बाद सामने आया, जिसमें इन काउंटी के गठन की पुष्टि की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने शुक्रवार को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि भारत ने कभी भी चीन के “गैरकानूनी कब्जे” को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन नई काउंटी के गठन से भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
