कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर ठेका श्रमिकों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा ठेका श्रमिकों ने
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष बैनर्जी ने कहा – एनटीपीसी में किया जा रहा है श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन
कोरबा। के.एस.टी.पी.एस. एनटीपीसी कोरबा के उत्पादन कंपनी के कामगार यूनियन के नेतृत्व में ठेका श्रमिकों की समस्याओं को लेकर के सी जैन मार्ग से बड़ी संख्या में ठेका मजदूरों ने पदयात्रा निकाली, जो कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर प्रदर्शन में तब्दील हो गई। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपा गया। रैली और प्रदर्शन में प्रमुख रूप से सीटू के प्रदेश अध्यक्ष एस एन बैनर्जी, किसान सभा से प्रशांत झा, दीपक साहू,दामोदर श्याम शामिल रहे।

एनटीपीसी कामगार यूनियन के अध्यक्ष फागू राम कश्यप ने बताया कि पदयात्र सी जैन मार्ग से शुरू होकर दर्री बाजार,कोहड़िया, सीएसईबी चौक, घंटाघर,कोसाबाड़ी होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंची। कोरबा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ठेका श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। रैली में बालको सीटू यूनियन,परिवहन संघ और किसान सभा ने सहयोग प्रदान किया।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड बैनर्जी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि एनटीपीसी संपूर्ण देश की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करता है, इसे महारत्न का दर्जा प्राप्त है। इस संयंत्र में प्रचालन एवं अनुरक्षण,सिविल कार्यों को ठेकेदार के माध्यम से करवाया जाता है, जहा´ श्रमिकों को केंद्रीय नियूनतम वेतन लागू है, परंतु श्रम कानूनों का खुलेआम उलंघन किया जा रहा है। ठेका श्रमिकों को पैसा भुगतान के बाद ठेकेदार के मुंशी द्वारा पैसे को वापस वसूला जाता है, नहीं देने या विरोध करने पर गेट पास बंद कर काम से निकाल दिया जाता है, जिससे मजदूरों में डर और आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन ने ठेका श्रमिकों की समस्या का समाधान नहीं किया, तो आगे प्लांट में उग्र आंदोलन होगा।
प्रदर्शन और रैली में प्रमुख रूप से गुरुमूर्ति,सुमरित कश्यप,जी. डी. महंत, फुल बाई, जीरा बाई, हेम लाल,अजय समेत बड़ी संख्या में ठेका मजदूर शामिल थे।
प्रमुख मांगे´
- आई टी आई के कुशल मजदूरों को तत्काल काम में वापस लिया जाए।
- ठेका बदलने पर ठेका श्रमिकों को नहीं बदला जाए।
- सभी श्रमिकों का गेट पास, पेस्लीप, हाजरी कार्ड, दिया जाए।
- ठेकेदार के मुंशियो´ द्वारा वेतन मिलने के बाद प्रतिदिन का 250/- से 350/- रुपए वापस लेना बंद किया जाए।
