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CM साय बोले-चंगाई सभा के जरिए हो रहा धर्मांतरण:कहा-आदिवासी हिंदू नहीं है कहकर बहकाया जा रहा, कई संस्थाएं सनातन को कमजोर करने में लगी

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चंगाई सभा के माध्यम से धर्म परिवर्तन किए जा रहे हैं। कई संस्थाएं और विधर्मी लोग लगे हैं, जो सनातन को कमजोर कर रहे हैं। यह बात मुख्यमंत्री ने गरियाबंद में आयोजित गायत्री परिवार के एक कार्यक्रम में कही।

सीएम ने खुले तौर पर मंच से कहा कि कुछ अधर्मी लोग और संस्थाएं आदिवासियों को जनजाति समूह क्षेत्र में जनजाति क्षेत्र में लोगों को बहका रही है। वे कहते हैं कि आदिवासी हिंदू नहीं है। यह कहकर सनातन के देवी-देवताओं से जनजाति क्षेत्र के लोगों को दूर किया जा रहा है।

हरिद्वार से आए संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के उप कुलाधिपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने मुख्यमंत्री से की बात।

हरिद्वार से आए संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज के उप कुलाधिपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने मुख्यमंत्री से की बात।

सरगुजा में तेजी से हो रहा धर्मांतरण

यह कार्यक्रम रविवार को गरियाबंद जिले में आयोजित किया गया था। जिला मुख्यालय के गांधी मैदान में आयोजित राष्ट्र जागरण 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में CM साय पत्नी कौशल्या के साथ शामिल हुए।

मंच से उन्होंने प्रदेश में धर्मांतरण की घटनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा- मैं जनजाति समाज से आता हूं। सरगुजा संभाग में धर्मांतरण का काम जोरों से होता रहा है। यहां एशिया महाद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है।

सीएम ने कहा कि स्व दिलीप सिंह जूदेव जी जशपुर राजपरिवार से थे। 5 बार सांसद केंद्र में मंत्री रहते हुए उन्होंने लाखों कन्वर्टेड ईसाइयों के पैर धोकर उनकी घर वापसी करवाई और उनको हिंदू बनाया।

भूखमरी में धर्मांतरण हुए

CM ने मंच से कहा कि जब MP था तब लोग कोदो, कुटकी, महुआ खाते थे। मिशनरीज का रिजेक्टेड गेहूं आता था, उसे लेने के लिए धर्मांतरण किया। लेकिन प्रदेश में अब भुखमरी के हाल नहीं हैं। 1 रुपए में राशन मिलता है।

कई विधर्मी लोग और संस्थाएं सनातन के देवी-देवताओं से जनजाति क्षेत्र में आदिवासियों को दूर करने का काम कर रहे हैं। चंगाई उसका माध्यम बना है। आज हमारे आदिवासी समाज में कन्वर्जन कम हो गया है। जो थोड़ा समृद्ध हैं पढ़े लिखे हैं, उनमें भी धर्मांतरण हो रहा है।

कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार के सदस्यों ने वेदमाता गायत्री के 108 कुण्डीय महायज्ञ का भव्य आयोजन किया है और गायत्री महायज्ञ के माध्यम से समाज को धर्म, सद्कर्म से जोड़ने और सद्भाव बढ़ाने का प्रयास किया है।

हरिद्वार से चिन्मय पांड्या भी पहुंचे

देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के उप कुलाधिपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि मनुष्य को जीवन एक स्वर्णिम अवसर के रूप में मिला है, जिसे अच्छे उद्देश्य में लगाना चाहिए। गायत्री परिवार इंसान के अंदर देवत्व की भावना को जगाने वाला परिवार है। यज्ञ हमें श्रेष्ठ कर्म की ओर प्रेरित करता है।

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