कोरबा। पेस्ट फिल तकनीक से कोयला निकालने कोल इंडिया की एसईसीएल सिंघाली पहली खदान बनी है।
कोरबा एरिया के ढेलवाडीह-सिंघाली-बगद ेवा सब एरिया की इस अंडरग्राउंड कोल माइंस में पेस्ट फिलिंग टेक्नोलॉजी परियोजना का एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी, योजना व परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र ने किया। एसईसीएल कोरबा एरिया में भूमिगत खदानें भी है। इनमें से एक सिंघाली खदान भी है, जहां अब कोयला निकालने पेस्ट फिल तकनीक को अपनाया जाएगा। एसईसीएल व टीएमसी मिनरल्स रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच 7040 करोड़ रुपए पेस्ट फिल तकनीक परियोजना पर हस्ताक्षर हुआ है। इससे अब सिंघाली खदान में कोयला खनन के तरीके में बदलाव आएगा।
अब तक कोयला निकालने पर मोटा पिलर छोड़ा जाता है। ऐसा ऊपरी सतह की सुरक्षा के लिए किया जाता है, लेकिन अब मोटा पिलर छोड़ने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पेस्ट फिल से कोयला निकालने के बाद भूमिगत खदान के खाली हिस्से को भरा जाएगा। इस आधुनिक खनन तकनीक से खदानों से निकले फ्लाई ऐश, टेलिंग्स या अपशिष्ट पदार्थों को पानी और सीमेंट जैसे बाइंडर्स के साथ मिलाकर पेस्ट के रूप में भूमिगत माइंस खाली स्थानों में भरा जाता है। यह तकनीक न केवल भूमिगत सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाती है, बल्कि सतह पर अपशिष्ट निपटान की समस्या को भी काफी हद तक कम करती है। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा व सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा मिलता है।
पेस्ट फिल तकनीक भूमिगत खदानों में अपनाने की टेस्टिंग सफल होने के बाद यह निर्णय लिया है। भूमिपूजन कार्यक्रम में ठेका कंपनी टीएमसी के प्रबंध निदेशक अतुल द्विवेदी, एसईसीएल के महाप्रबंधक (उत्पादन) अजय तिवारी, कोरबा एरिया जीएम राजेश कुमार गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे।
