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कॉकरोच जनता पार्टी का 5 सितंबर को फिर दिल्ली मार्च:कहा- छात्रों पर दर्ज केस खत्म नहीं हुए, हमारे धैर्य को कमजोरी न समझें

नई दिल्ली, एजेंसी। कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालेगी। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। इन्हीं वादों के भरोसे पर जंतर-मंतर का प्रदर्शन वापस लिया गया था।

मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें उन स्टूडेंट्स के परिजन भी शामिल होंगे, जिन्होंने NEET पेपर लीक के बाद सुसाइड किया था। इससे पहले CJP ने 20 जुलाई को भी जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था।

सोमवार को CJP ने अपनी वर्किंग कमेटी की वर्चुअल मीटिंग के बाद यह फैसला लिया। पार्टी ने कहा कि सरकार ने कहा था कि छात्रों पर दर्ज केस खत्म होंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझना चाहिए।

CJP ने नीट पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी की मांगों को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। 25 जुलाई को सरकार से आश्वासन मिलने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपना आंदोलन खत्म किया था।

20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च निकाला था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी परमिशन नहीं दी थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था।

CJP बोली- वादे पूरे होने तक पीछे नहीं हटेंगे

CJP नेता सौरव दास और रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार को आंदोलन खत्म होने के बाद किए गए वादे पूरे करने चाहिए। सभी FIR वापस लेनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकनी चाहिए।

वहीं, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी दें।

सौरव दास बोले- लोकतंत्र के लिए संवाद जरूरी

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “लोकतंत्र तभी काम करता है जब सरकार में बैठे लोगों और उन्हें चुनने वालों के बीच निरंतर संवाद हो। जब दोनों के बीच संचार टूट जाता है, तो समस्याएं और संघर्ष पैदा होते हैं।”

वहीं, पार्टी ने सभी युवाओं, छात्रों, युवा संगठनों और छात्र संगठनों से 5 सितंबर को इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने और मार्च में शांतिपूर्वक भाग लेने की अपील की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी थी FIR की लिस्ट

CJP ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को केंद्र से छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR की लिस्ट मांगी थी। पार्टी का दावा है कि कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को रद्द करने पर विचार कर सकता था।

CJP का आरोप है कि केंद्र ने FIR की सूची देने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। पार्टी ने इसे आंदोलन खत्म कराने से पहले किए गए वादों से पीछे हटने का संकेत बताया।

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