रायपुर,एजेंसी। रायपुर दक्षिण उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। पूर्व सांसद सुनील सोनी को दक्षिण उपचुनाव में उतारा है। अब कांग्रेस इस बात को लेकर टेंशन में है कि सोनी के खिलाफ किसे मैदान में उतारा जाए। चेहरों को लेकर मंथन तेज है। वहीं कांग्रेस के दावेदारों को भी प्रत्याशी के नाम का इंतजार है।
दक्षिण के उपचुनाव में कांग्रेस के पास दर्जनभर से ज्यादा दावेदार हैं, लेकिन नगर निगम सभा पति प्रमोद दुबे, युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा और कन्हैया अग्रवाल इस सीट के लिए 3 सबसे चर्चित नाम हैं। तीनों ही नेता खुलकर टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी
प्रमोद दुबे की दावेदारी सबसे प्रबल मानी जा रही
प्रमोद दुबे की दावेदारी फ़िलहाल सबसे प्रबल मानी जा रही है। दक्षिण में दुबे कांग्रेस का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। सोनी और प्रमोद दुबे 2019 की लोकसभा चुनाव में भी रायपुर की सीट पर आमने सामने थे। इसके अलावा दोनों ही महापौर, पार्षद और निगम के सभा पति जैसे पदों पर रह चुके हैं।
सोनी के सामने फ़िलहाल दुबे ही कांग्रेस के लिए सबसे सेफ और बड़ा चेहरा माने जा रहे हैं। प्रमोद दुबे ने उपचुनाव के लिए नामांकन भी ले लिया है।
आकाश शर्मा की दावेदारी इस बार मजबूत
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की दावेदारी इस बार मजबूत मानी जा रही है, युवा चेहरा, ब्राह्मण समाज के वोट बैंक को साधने के लिए भी पार्टी इन्हें टिकट दे सकती है। 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में भी शर्मा ने इस सीट से टिकट मांगी थी।
2018 में कन्हैया ने बृजमोहन को दी थी टक्कर
इस सीट के लिए तीसरा सबसे चर्चित नाम कन्हैया अग्रवाल का है। पार्टी ने इन्हें 2018 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से टिकट दिया था। चुनाव भले ही बृजमोहन जीत गए हों, लेकिन जीत हार का अंतर कुछ हजार वोटों का ही था।
कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन
कांग्रेस की बढ़ी कठिनाई
रायपुर दक्षिण उपचुनाव में सुनील सोनी को प्रत्याशी बनाने से बृजमोहन अग्रवाल की सुनी नहीं जा रही वाली सारी अटकलें फिलहाल शांत हो गई हैं, लेकिन इससे कांग्रेस की कठिनाइयां बढती हुई नजर आ रही हैं। सोनी बृजमोहन के करीबी भी हैं। ऐसे में बृजमोहन अग्रवाल अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में नजर आएंगे, जो कि कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।
सम्मेलन के बाद प्रत्याशी के नाम पर अंतिम फैसला
संभावना जताई जा रही है कि कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद 21 अक्टूबर को चुनाव समिति दावेदारों के नाम पर विचार कर देर रात आलाकमान को पैनल सौंप देगी। वहीं दूसरे दिन आलाकमान की मंजूरी मिलते ही किसी भी समय प्रत्याशी का ऐलान हो सकता है।
स्थानीय की मांग भी स्वीकार
कार्यकर्ताओं ने दक्षिण में स्थानीय प्रत्याशी की मांग पर ही जोर दिया है। इसे भी संगठन ने सहज तौर पर स्वीकार किया है। दक्षिण में काम कर रहे पदाधिकारी बूथ कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर ही चुनाव संचालन और प्रबंधन को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।
परंपरागत बेल्ट में मशक्कत के साथ पुराने कांग्रेसी परिवारों को जोड़ने और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश होती रही है।
