रायपुर,एजेंसी। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम खेती को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने 12 मार्च को प्रदेशभर के भाजपा जिला कार्यालयों के घेराव करने का ऐलान किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि, भाजपा के संरक्षण में प्रदेश में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। पार्टी से जुड़े नेता आरोपियों को बचाने में लगे हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि, इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर की भूमिका गंभीर है, लेकिन उसे मुख्य आरोपी बनाने के बजाय सह-अभियुक्त बनाया गया है। जिस व्यक्ति को सिर्फ निलंबित किया गया है, उसे पार्टी से तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर भाजपा कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा।

समोदा गांव में अवैध तरीके से पिछले करीब 5 साल से अफीम की खेती की जा रही थी।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध तरीके से पिछले करीब 5 साल से अफीम की खेती की जा रही थी, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। 6 मार्च 2026 को मामला तब सामने आया, जब गांव के कुछ बच्चों को खेत में अजीब तरह के पौधे मिले।
बच्चों ने इसकी तस्वीर इंटरनेट पर सर्च की, तो पता चला कि यह अफीम का पौधा है। इसके बाद पूरे गांव में चर्चा शुरू हो गई और मामला प्रशासन तक पहुंच गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भाजपा नेता विनायक ताम्रकर को गिरफ्तार किया और खेत से करीब 8 करोड़ रुपए कीमत के अफीम के पौधे जब्त किए।
गांव में विनायक ताम्रकर का था दबदबा- ग्रामीण
इस मामले में ग्रामीणों ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव की महिलाओं का कहना है कि, विनायक ताम्रकर का गांव में इतना दबदबा था कि बिना उनकी अनुमति के कोई भी उनके खेतों के आसपास जाने की हिम्मत नहीं करता था।
कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि, गांव में अगर किसी की मौत भी हो जाती थी, तो अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशान ले जाने से पहले भी ताम्रकर की अनुमति लेनी पड़ती थी। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव के सरकारी शौचालय तक पर उनका कब्जा था। बिना उनकी मर्जी के वहां जाना भी मुश्किल था।
फार्महाउस चारों तरफ से बंद, अंदर चल रही थी खेती
गांव के निवासी का कहना है कि, जिस जगह अफीम की खेती की जा रही थी, वहां चारों तरफ गेट लगाए गए थे। इस कारण आम लोगों का वहां जाना लगभग असंभव था।
ग्रामीणों का कहना है कि, गांव के अधिकतर लोगों ने पहले कभी अफीम का पौधा देखा ही नहीं था। ऊपर से ताम्रकर के डर के कारण कोई भी उस इलाके की तरफ जाने से बचता था। इसी वजह से इतने बड़े इलाके में अफीम की खेती होती रही और किसी को पता तक नहीं चला।
कुएं और तालाब तक पर कब्जे का आरोप
गांव के ही निवासी ने बताया कि, गांव का एक पुराना कुआं, जिससे पहले पूरे गांव के लोग पानी लेते थे। उस पर भी ताम्रकर ने कब्जा कर लिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कुएं ही नहीं, बल्कि आसपास के तालाब और वहां तक जाने वाली सड़क पर भी उनका दबदबा था। गांव के लोगों को इन जगहों का इस्तेमाल करने से भी कई बार रोका जाता था।
लीज पर ली गई जमीन पर उगाई जा रही थी अफीम
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि, जिस जमीन पर अफीम के पौधे मिले, वह जमीन राजस्थान के जोधपुर निवासी आचल दास ने लीज पर ली हुई थी। गिरफ्तार आरोपी विकास विश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वो पिछले करीब चार साल से समोदा गांव में रह रहा था और विनायक ताम्रकर की करीब 13 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहा था। यहां पहले कपास की खेती की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, आचल दास फिलहाल होली मनाने अपने गृहग्राम गया हुआ है। इस मामले में उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
विरोध में उतरे ग्रामीण, सियासत भी तेज
इस मामले के खुलासे के बाद गांव में विरोध का माहौल बन गया। जब मीडिया की टीम गांव पहुंची तो कई महिलाएं समूह बनाकर आरोपी के खिलाफ नारे लगाते हुए विरोध कर रही थीं।
इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अफीम की खेती वाली जगह का जायजा लेने पहुंचे। मौके पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच बहस भी हुई और कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
कांग्रेस का ऐलान, भाजपा कार्यालयों का घेराव
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि, भाजपा नेताओं के संरक्षण में प्रदेश में नशे का कारोबार बढ़ रहा है। अगर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो 12 मार्च को प्रदेशभर में भाजपा जिला कार्यालयों का घेराव कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
