बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उस पर करोड़ों रुपए की सड़क निर्माण परियोजना में गड़बड़ी करने, घटिया गुणवत्ता का काम कराने और फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
वहीं, मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और वह एक हत्या के मामले में भी सह-आरोपी बताया गया है। ऐसे में नियमित जमानत देना उचित नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपों की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए यह जमानत याचिका मंजूर नहीं की जा सकती।
कैसे 4 लोगों को मिला टेंडर और घोटाला हुआ?
दरअसल, 2009 में केंद्र सरकार ने सड़क आवश्यकता योजना स्पेशल प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। 2009 के प्रोजेक्ट का 2015 में एग्रीमेंट हुआ था। गंगालूर से मिरतुर तक सड़क के लिए लगभग 56 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे।
15 साल में सड़क की दूरी उतनी ही है, जितनी पहले थी, लेकिन 56 करोड़ रुपए में बनने वाली सड़क 120 करोड़ रुपए पहुंच गई। सड़क निर्माण का ठेका 4 फर्मों को मिला था। हर 2 किमी की सड़क निर्माण के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किया गया। 32 किलो मीटर सड़क के काम को 16 भागों में बांटा गया और एग्रीमेंट किया गया।

सुरेश चंद्राकर ने बाड़े में कब्जा कर रखा था। यहीं के सेप्टिक टैंक में मारकर मुकेश को डाला था।
सड़क निर्माण का काम ठेकेदार सुरेश चंद्राकर कर रहा था। 52 किलोमीटर की सड़क को टुकड़ों में बनाया गया। लगभग 12 से 15 किमी तक डामर बिछाया गया, लेकिन क्वालिटी इतनी घटिया थी कि कुछ ही दिन में सड़क उखड़ने लगी। इसके अलावा बीच-बीच में गिट्टी और मुरुम डाल दिया गया था, जो चलने लायक भी नहीं थी।
30 जुलाई को गिरफ्तार किए गए थे 5 अधिकारी, लेकिन मिल गई बेल
30 जुलाई 2025 को गंगालूर से मिरतुर तक सड़क निर्माण में 120 करोड़ की घोटाला केस में पुलिस ने PWD के 5 अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इसमें रिटायर्ड EE आर. साहू, वीके. चौहान, सुकमा के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचएन पात्र के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
इसके साथ ही पुलिस ने बीजापुर SDO प्रमोद सिंह कंवर, जगदलपुर के डिप्टी इंजीनियर संतोष दास को गिरफ्तार किया था, लेकिन सभी आरोपियों को घोटाला केस में बेल मिल गई थी। पांचों अधिकारी घोटाला केस में आरोपी हैं। मामले की जांच चल रही है।
कब और कैसे ठेकेदार ने पत्रकार मुकेश को मार डाला ?
दरअसल, 1 जनवरी 2025 को बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर का मर्डर हुआ। हत्यारों ने पहले डिनर पर बुलाया। खाना खिलाकर जमकर पीटा। जब मुकेश अधमरा हो गया, तो उसका गला घोंटा, फिर रॉड से सिर पर मारा, जिससे ढाई इंच घाव हो गया था।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर को मारने की साजिश 29-30 दिसंबर 2024 को रची गई थी। दिनेश, रितेश और सुरेश चंद्राकर तीनों मुकेश के चचेरे भाई हैं। रितेश सबसे करीबी दोस्त था। मुकेश के साथ दोनों ने पढ़ाई की थी। इनके बीच रिश्ता काफी गहरा था। दोनों कपड़े तक शेयर करते थे।
3 जनवरी को लाश मिलने के बाद पुलिस ने 4 जनवरी को मुकेश के 2 चचेरे भाई दिनेश, रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार किया। वहीं मास्टरमाइंड ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को भी अरेस्ट किया था। वारदात के बाद सभी का अलग-अलग लोकेशन पर भागने का रूट पहले से तय था।
