एसईसीएल के खण्डहर में संचालित है कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुलसीनगर
आश्चर्य: चार कमरों में लग रहीं 15 कक्षाएं
दो-दो हजार के 5 मानदेय शिक्षक पढ़ा रहे हैं 15 कक्षाएं
कोरबा। कोरबा जिले में किसी स्कूल के खिलाफ शासन द्वारा बड़ी कार्यवाही की गई है। सरकार द्वारा शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की फीस सरकार द्वारा वहन की जाती है और इस सहायता राशि की जमकर बंदरबाट का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। फर्जी दर्ज संख्या दिखाकर कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुलसी नगर कोरबा द्वारा आरटीई की लाखों की राशि प्राप्त कर ली और अब शासन के निर्देश पर कोरबा डीईओ ने 11.36 लाख रूपए का रिकव्हरी नोटिस विद्यालय के डायरेक्टर एवं प्राचार्य अरूण कौंसिल को जारी किया है। शासन ने उक्त विद्यालय की मान्यता समाप्त करने का निर्देश डीईओ को दिया है।
विद्यालय की शिक्षा समिति द्वारा करोड़ों के घोटाले का संदेह
गौरव युवा मंडल द्वारा तुलसी नगर में कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का संचालन एसईसीएल की खण्डहरनुमा इमारत में करीब 25 वर्षों से किया जा रहा है। उक्त विद्यालय बीच में कई वर्षों तक बंद रहा, लेकिन तिकड़मबाज और खाकी पेंट की आड़ में जब आरटीई प्रारंभ हुआ, तो इन्होंने फिर से विद्यालय का संचालन प्रारंभ किया। खण्डहरनुमा एसईसीएल की झोपड़ीनुमा आफिस को कब्जे में लिया और विद्यालय का संचालन प्रारंभ किया। खण्डहर होने के कारण बच्चे यहां एडमिशन नहीं ले रहे थे, लेकिन शातिर अरूण कौंसिल ने आसपास के बच्चों के अभिभावकों को बरगलाकर एडमिशन लिया। अभी विद्यालय केजी से 12वीं तक की कक्षाओं संचालित है और कुल 67 विद्यार्थियों का आपार आईडी विभाग को दिया है, लेकिन यूडाईस में कौंसिल ने 125 विद्यार्थियों की जानकारी शिक्षा विभाग को दी है।
आरटीआई में कौंसिल के कारनामों का भंडाफोड़
एक युवक ने कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुलसी नगर की मान्यता संबंधी दस्तावेज के साथ आरटीई में मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी आरटीआई के माध्यम से हासिल किया और प्रशासन के साथ शासन को भी इसकी शिकायत करते हुए जांच की मांग की। जांच रिपोर्ट में अरूण कौंसिल द्वारा आरटीई के लिए मिलने वाली राशि में जमकर घोटाला किया गया और फर्जी दर्ज संख्या बताकर हर साल लाखों की राशि का गबन करता रहा। शासन के शिक्षा सचिव का पत्र मिलने के बाद डीईओ ने बड़ी कार्यवाही करते हुए वर्ष 2022-23, 2023-24 को मिलने वाली राशि में से 11.36 लाख का रिकव्हरी आदेश जारी किया है।
करोड़ों का हो सकता है घोटाला
शिकायतकर्ता सौरभ अग्रवाल ने जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुलसी नगर में आरटीई से मिलने वाली सहायता राशि का 2011 से 2022 तक की जांच की जाए तो घोटाले का मामला करोड़ों में आ सकता है।
फर्जी लोगों की शिक्षण समिति
प्राचार्य अरूण कौंसिल ने गौरव युवा मण्डल के नाम से शिक्षण समिति बनाई है, जिसमें फर्जी लोगों का बोलबाला है। उन्होंने समिति की अध्यक्ष चंद्रकला कौंसिल को बनाया है, इसके अलावा अन्य सदस्य शामिल हैं। पूरा खेल शिक्षण समिति द्वारा खेला गया है और मास्टरमाइंड हैं प्राचार्य अरुण कौंसिल।
मान्यता होगी रद्द
शिक्षा विभाग के सचिव ने कोरबा डीईओ टी पी उपाध्याय को निर्देशित करते हुए पत्र जारी किया है, जिसके मुताबिक डीईओ ने नियम एवं शर्तों को ताक में रखकर 2018 से 2025 तक मान्यता कौंसिल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को मान्यता दी गई है, उसमें विद्यालय किसी भी शर्तों में खरा नहीं उतरता। न जाने डीईओ ने किस तरह उक्त विद्यालय को मान्यता दी, यह भी जांच का विषय है। अब विद्यालय की मान्यता रद करने का आदेश पारित किया गया है।
आश्चर्य: चार कमरों में 15 कक्षाएं
अरूण कौंसिल ने झोपड़ीनुमा घर में केजी से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित कर रहा है। एसईसीएल का उक्त आफिस जर्जर होने के बाद अरुण कौंसिल ने उसे हथिया लिया और विद्यालय प्रारंभ किया। मरम्मत कर चार कमरों को ठीक किया, लेकिन खपरेल की छत को मरम्मत तक नहीं कराया और बरसात के दिनों में पानी कमरों में भर जाता है, फिर भी कक्षाएं संचालित हो रही हैं।

शिक्षा सचिव ने आश्चर्य जाहिर करते हुए कड़ी टिप्पणी की है- चार कमरों में 15 कक्षाएं संचालित हो रही है और आपने मान्यता दे दी।
विद्यालय प्रबंधन ने केजी से 12वीं तक 115 बच्चों की दर्ज संख्या होने की जानकारी दी है, लेकिन अधिकांश फर्जी नाम सामने आए हैं। केजी से 12वीं तक मात्र 5 मानदेय शिक्षक की जानकारी दी गई है और 5 शिक्षक ही 15 कक्षाओं को पढ़ा रहे हैं। आपने मान्यता कैसे दे दी! सभी शिक्षकों को कैश में पेमेंट दिया जाता है और यह भी जांच का विषय है। दो-दो हजार में शिक्षकों का अपाईमेंट किया गया है।
खाकी पेंट की वजह से मान्यता
अरूण कौंसिल अपने आपको खाकी पेंट वाला शख्सियत बताकर धौंस जमाकर डीईओ से मान्यता ले ली। जिला शिक्षा अधिकारी ने न तो निरीक्षण टीम भेजा और न ही दर्ज संख्याओं का वेरिफिकेशन किया। आरटीई के पैसों के बंदरबाट में शिक्षा अधिकारी-शिक्षा विभाग कहीं संलग्न तो नहीं।
वह जांच रिपोर्ट, जिस पर हुई कार्यवाही
