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Crude Oil Import: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल इंपोर्ट में बड़ी गिरावट

मुंबई, एजेंसी। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। हालिया शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में भारत के कच्चे तेल के आयात में फरवरी के मुकाबले करीब 13% की गिरावट दर्ज की गई है।

इस गिरावट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस रूट से आने वाली सप्लाई में भारी कमी आई है और खाड़ी देशों से तेल आयात 61% तक गिरकर लगभग 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम हो गई है।

रूस बना नंबर-1 सप्लायर

खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। रूस से आयात लगभग दोगुना होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 50% हो गई है।

सऊदी अरब दूसरे नंबर पर

वहीं सऊदी अरब अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि अंगोला से आयात बढ़ने के कारण वह तीसरे नंबर पर आ गया है। यूएई और इराक क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर खिसक गए हैं। इस बदलाव का असर ओपेक पर भी पड़ा है। भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29% रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। 

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की तेल आपूर्ति रणनीति को बदल दिया है, जहां खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होकर रूस और अन्य विकल्पों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

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