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भूपेश बोले- सोनिया गांधी की किताब से BJP को खतरा:कहा- निडर महिला हैं, अपने अनुभवों पर लिखेंगी तो भाजपा को हो सकता है नुकसान

रायपुर, एजेंसी। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भाजपा पर हमलावर हैं। किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर सामने आई खबरों के बाद बघेल ने सोनिया गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि कायर लोग किताबों और विचारों से डरते हैं।

बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- “कायर लोग किताबों से डरते हैं! किताबों के छपने और पढ़े जाने से डरते हैं।” उन्होंने कहा कि इसी डर की वजह से किताब छापने वालों को डराया-धमकाया जाता है।

भूपेश बघेल ने साधा भाजपा पर निशाना

भूपेश बघेल ने साधा भाजपा पर निशाना

बघेल के मुताबिक, सोनिया गांधी की किताब दुनियाभर में प्रकाशित हो रही है, लेकिन भारत में एक प्रकाशक ने इसे छापने से इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे कायराना हरकत बताते हुए कहा कि किताब आएगी और पढ़ी भी जाएगी।

किताब को लेकर भूपेश बघेल का सोशल मीडिया पोस्ट

‘सोनिया निडर महिला हैं, उनके अनुभवों से BJP को खतरा हो सकता है’

मीडिया से बातचीत में भी बघेल ने इसी मुद्दे पर भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी निडर महिला हैं। अगर वह अपने अनुभवों पर किताब लिखती हैं तो हो सकता है भाजपा की सेहत को इससे खतरा हो, इसलिए किताब को रोकने की कोशिश की जा रही है।

बघेल का आरोप है कि किताब में सोनिया गांधी के अनुभव और उनकी बातें सामने आने से भाजपा असहज हो सकती है। इसी वजह से किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

बघेल बोले- किताब को रोक नहीं पाएंगे

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में भाजपा पर सीधे हमला करते हुए कहा कि किताबों के छपने और पढ़े जाने से डरने वाले लोग उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसी कोशिश सफल नहीं होगी।

उन्होंने लिखा- डर से एक किताब का न ‘छपना’ एक कायराना हरकत है। लेकिन कायर जान लें और समझ लें। किताब तो आएगी, और पढ़ी भी जाएगी।

क्या है ‘Belonging’ को लेकर विवाद?

सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ में उनके जीवन और भारत से जुड़े अनुभवों का जिक्र है। किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन नवंबर में होना प्रस्तावित है।

भारत में इसके प्रकाशन को लेकर विवाद तब सामने आया, जब रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Penguin Random House India ने किताब प्रकाशित करने से कदम पीछे खींच लिया।

हालांकि, Penguin India ने इन खबरों का खंडन किया है। कंपनी ने कहा है कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है और यह कहना सही नहीं है कि लेखिका द्वारा संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने के कारण किताब प्रकाशित नहीं हुई।

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