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होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी करने वाले ईरानी कमांडर की मौत:इजराइल के हमले में घायल हुए थे तंगसीरी, ईरान बोला- ऑपरेशन पर असर नहीं पड़ेगा

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी से जुड़े IRGC नेवी चीफ अलीरेजा तंगसीरी की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। वे पिछले हफ्ते इजरायली एयरस्ट्राइक में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, तंगसीरी हमले के समय कोस्टल डिफेंस और मैरीटाइम ऑपरेशंस से जुड़े थे। उन्हें होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकेबंदी का प्रमुख चेहरा माना जाता था, जिसके जरिए ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बनाया।

ईरान ने उनकी मौत के बावजूद साफ किया है कि उसके सैन्य ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा और रणनीति पहले की तरह जारी रहेगी। गौरतलब है कि इजराइल के रक्षा मंत्री ने 26 मार्च को दावा किया था कि एक एयरस्ट्राइक में तंगसीरी को मार गिराया गया।

जंग से जुड़ी तस्वीरें…

कुवैत में बिजली और पानी के प्लांट पर हुए हमले के बाद आग लग गई थी। हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है।

ईरान ने रविवार को दक्षिणी इजराइल के केमिकल प्लांट रामत होवाव पर मिसाइल से हमला किया।

ईरान ने रविवार को वीडियो जारी कर इजराइल के इंडस्ट्रियल इलाके में मिसाइल हमलों को दिखाया।

लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में सोमवार सुबह इजराइली हवाई हमले के बाद वहां से धुआं उठता देखा गया।

ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की धमकी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट तुरंत नहीं खोला गया और समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों को तबाह कर देगा।

सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रम्प ने कहा कि पावर प्लांट, ऑयल वेल और खार्ग आइलैंड को पूरी तरह उड़ा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर डीसैलिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बनाया जा सकता है।

ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका एक नए और ज्यादा समझदार शासन के साथ बातचीत कर रहा है और इसमें प्रगति हो रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई तेज की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी सैनिकों और अन्य लोगों की मौत का बदला लेने के लिए उठाया जाएगा, जिनके लिए उन्होंने ईरान को जिम्मेदार ठहराया।

ईरान बोला-कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया

ईरान ने आरोप लगाया है कि कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया है। ईरानी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान को बदनाम करने और उस पर आरोप डालने की साजिश के तहत की गई।

तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने इस हमले को ‘जायनिस्ट शासन’ (इजराइल) की क्रूर कार्रवाई बताया है और कहा है कि इसके गंभीर नतीजे होंगे।

ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, उनके सैनिक और हित अब निशाने पर रहेंगे। साथ ही, इजराइल की सैन्य, सुरक्षा और आर्थिक संरचनाओं को भी टारगेट करने की बात कही गई है।

फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 क्रू मौजूद

ईरान जंग के बीच फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 भारतीय क्रू मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी तरह की समुद्री घटना नहीं हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

भारत सरकार के मुताबिक, हाल ही में दो भारतीय LPG कैरियर BW TYR और BW ELM सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 8 भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।

स्पेन ने अमेरिका के लिए एयरस्पेस बंद किया

स्पेन ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। साथ ही, मिलिट्री बेस के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।

स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोब्लेस ने कहा कि देश न तो अपने एयरस्पेस और न ही सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान के लिए करने देगा।

इस फैसले के बाद अमेरिकी विमानों को अपने रूट बदलने पड़ेंगे, हालांकि मानवीय और आपातकालीन उड़ानों को छूट दी गई है।

स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने कहा कि यह फैसला एकतरफा और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध का समर्थन न करने के आधार पर लिया गया है।

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पहले ही अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले के जवाब में व्यापारिक कार्रवाई की धमकी दी है। इस निर्णय के बाद अमेरिका और स्पेन के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

ईरान बोला- लेबनान में राजदूत अपना काम जारी रखेगा

ईरान ने लेबनान के निष्कासन आदेश को ठुकराते हुए कहा है कि उसका राजदूत बेरूत में ही अपना काम जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि राजदूत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता रहेगा।

दरअसल, लेबनान ने पिछले हफ्ते ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर 29 मार्च तक देश छोड़ने का निर्देश दिया था।

हालांकि, तय समयसीमा गुजरने के बाद भी राजदूत बेरूत में ही मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।

ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार

ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच सिर्फ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उसकी ओर से भेजी गई शर्तें अतार्किक हैं। बघाई ने कहा कि ईरान का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है।

ईरान ने यह भी कहा कि उसे पूरी तरह पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत पर विचार करेगा। प्रवक्ता ने अमेरिकी कूटनीति पर तंज करते हुए कहा कि वहां खुद लोग उसके दावों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

पाकिस्तान में हुई बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि ये उनकी अपनी पहल है और तेहरान इसमें शामिल नहीं हुआ। उसने मिडिल-ईस्ट के देशों से कहा कि वे युद्ध खत्म करने की कोशिश करें, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।

हिजबुल्लाह बोला- इजराइल के हाइफा नेवल बेस पर मिसाइलें दागीं

हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा में नेवल बेस पर मिसाइलें दागी हैं। संगठन के मुताबिक, यह हमला इजराइल के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का हिस्सा है।

इस हमले के बाद हाइफा की एक ऑयल रिफाइनरी में आग लगने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग सीधे मिसाइल हमले से लगी या गिरते मलबे के कारण।

हिजबुल्लाह का दावा-114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया

लेबनान के हथियारबंद संगठन हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत से अब तक उसने 114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया है। यह जानकारी अल मायादीन चैनल के हवाले से सामने आई है। हालांकि, इजराइली सेना की ओर से भी इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ईरानी स्पीकर बोले- ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा न करें

ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने निवेशकों को सलाह दी है कि ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा करके फैसला न लें। उनका कहना है कि जब अमेरिकी बयान से बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो, तो उसी दिशा में चलने के बजाय उल्टा सोचकर कदम उठाना बेहतर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बयान का फायदा बाजार के बड़े खिलाड़ी उठा रहे हैं। ट्रम्प ने 22 मार्च को कहा था कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत और उसके एनर्जी ठिकानों पर हमले टाल दिए गए हैं। इससे बाजार में राहत आई, अमेरिकी शेयर बाजार चढ़े और तेल की कीमतें गिर गईं।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद हालात बदल गए। ट्रम्प ने फिर सख्त बयान दिए, इजराइल ने तेहरान पर हमले किए और सऊदी अरब में ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आईं। इसके बाद बाजार पलट गया। शेयर गिरे और तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं।

कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि बड़े एलान से पहले ही बाजार में अचानक ज्यादा खरीद-फरोख्त होने लगती है, जिससे लगता है कि कुछ लोगों को खबर पहले से मिल जाती है।

गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान में घुसती है, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की बात करता है, लेकिन अंदर ही अंदर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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