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करंट से मजदूर की मौत…रेलवे-अफसरों को HC से फटकार:GM से 3 दिन में मांगा जवाब,हाइटेंशन-तार में झुलसा था,DRM-दफ्तर के बाहर परिजनों का प्रदर्शन

जांजगीर-चांपा/बिलासपुर। बिलासपुर के रेलवे कोचिंग यार्ड में ट्रेन की सफाई करते समय ठेका मजदूर की करंट में झुलसने से मौत हो गई। इसे लेकर चल रहे बवाल पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने रेलवे के रवैए पर सख्त नाराजगी जताई है।

साथ ही रेलवे के जीएम को तीन दिन में शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारी ठेका श्रमिक की मौत की जानकारी हाईकोर्ट से छिपाते रहे। अब नाराज परिजन डीआरएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।

रेलवे में OHE तार की करंट से झुलसे ठेका श्रमिक के इलाज को लेकर पिछले तीन दिन से बवाल मचा रहा। आखिरकार, गुरुवार को ठेका श्रमिक की मौत हो गई।

लेकिन, रेलवे प्रबंधन उसके इलाज और मुआवजे को लेकर आनाकानी कर रहा है। जिसके चलते परिजनों में आक्रोश है। इधर, हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है।

जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक था।

जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक था।

जानिए कैसे हुआ हादसा

जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक था। वो कोचिंग डिपो में इलेक्ट्रिशियन का काम कर रहा था। 23 अगस्त को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच का एसी सुधारते समय प्रताप बर्मन OHE तार की करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

परिजन का आरोप है कि, बिजली सप्लाई बंद किए बगैर ही प्रताप को कोच के ऊपर चढ़ा दिया गया था। सुरक्षा से खिलवाड़, अफसर और ठेकेदार की लापरवाही के चलते ये हादसा हुआ।

रेल अफसरों ने हाईकोर्ट को नहीं दी मौत की जानकारी

अब चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए एस-ईसीआर के जीएम और डीआरएम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जोड़ने के निर्देश दिए।

महज 15-20 मिनट में जुड़े जीएम पर रेलवे के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। वहीं, इस दौरान रेलवे के अफसर ठेका श्रमिक की मौत और अपोलो हॉस्पिटल में परिजन और ग्रामीणों के हंगामे की जानकारी को हाईकोर्ट से छिपाते रहे।

उन्होंने कोर्ट को नहीं बताया कि कर्मचारी की मौत हो गई है। डिवीजन बेंच ने रेलवे को तीन दिन का समय दिया है। इस दौरान जीएम को शपथपत्र दाखिल करना होगा, जिसमें घटना की पूरी जानकारी, इलाज और मुआवजे का विवरण और ठेकेदार पर की गई कार्रवाई का ब्योरा होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।

परिजन डीआरएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।

गुस्साए लोगों ने रात में डीआरएम ऑफिस के सामने किया प्रदर्शन

मृतक प्रताप बर्मन के परिजन नौकरी और मुआवजे की मांग करते रहे। इसे लेकर अपोलो अस्पताल में हंगामा होता रहा। इसके चलते उसके शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका है। वहीं, गुस्साए परिजन और ग्रामीणों ने गुरुवार की रात डीआरएम कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया।

देर रात सभी लोग वहीं पर बैठे रहे। जहां पामगढ़ की विधायक शेष राज हरवंश भी धरना स्थल पहुंच गई। नाराज परिजनों ने शुक्रवार को शव रखकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

पत्नी ने कहा- हमारा तो सब कुछ चला गया

डीआरएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठी उसकी पत्नी खुशबू बर्मन का कहना है कि, हादसे ने उसका पति छीन लिया है। गोद में मासूम बच्चा है। अब हमारा क्या होगा। हम कैसे अपने आप को पालेंगे। इसलिए रेलवे मुआवजा और नौकरी दे। बच्चे की पढ़ाई की भी जिम्मेदारी ले।

जब तक मांग पूरी नहीं होगी हम यहां से नहीं हटेंगे। परिवार के अन्य लोगों ने कहा कि, जब तक मांग पूरी नहीं होगी हम यहां से नहीं हटेंगे। आज पोस्टमॉर्टम के बाद शव को लेकर यहीं पर धरना देंगे। धरना स्थल पर मुलमुला और पामगढ़ क्षेत्र में बहुत सारे लोग मौजूद रहेंगे।

विधायक बोलीं- रेलवे और ठेकेदार ने बरती लापरवाही

पामगढ़ की विधायक शेष राज हरवंश का कहना है कि, जिस दिन हादसा हुआ उसी दिन मैंने अपोलो अस्पताल पहुंचकर प्रबंधन से चर्चा कर बेहतर इलाज के लिए कहा था। रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने लापरवाही बरती।

उन्हें हर दिन के इलाज का पैसा जमा करवाना था जो उन्होंने नहीं किया। परिजन शुरू से यही मांग कर रहे थे कि इलाज का खर्च रेलवे या ठेकेदार उठाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

नतीजा यह हुआ कि गंभीर रूप से झुलसे प्रताप बर्मन की मौत हो गई। उसके बाद भी अफसर आकर बात नहीं करना चाह रहे हैं। शाम को मैंने डीआरएम के पास सूचना भेजी थी।

उन्होंने बातचीत करने के लिए अपने कक्ष में बुलवाया भी था लेकिन परिजनों और ग्रामीणों की मांग की थी कि वे मौके पर आकर सभी के सामने बात करें। लेकिन अफसर नहीं आए। इसलिए सभी यहीं पर धरने पर बैठे हैं।

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