जगदलपुर, एजेंसी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और बिजली व्यवस्था के निजीकरण की तैयारी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
दीपक बैज ने कहा कि यूसीसी लागू होने से आदिवासियों को संविधान के तहत मिले विशेष प्रावधान प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए संविधान में दिए गए अधिकारों की रक्षा जरूरी है और कांग्रेस इसके लिए संघर्ष करेगी।
भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का लगाया आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय की तीन परीक्षाओं के पेपर लीक होने का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि आरक्षक भर्ती, वनरक्षक भर्ती, आरआई प्रमोशन, पीडब्ल्यूडी सब इंजीनियर भर्ती और पीएससी की एएसआई भर्ती समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में घोटाले कर युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल रही है।
बिजली कंपनी के निजीकरण का करेंगे विरोध
बैज ने बिजली के दाम बढ़ाने और 400 यूनिट तक की बिजली छूट खत्म करने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के जरिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। अब बिजली कंपनी के शेयर बेचने और निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का ठेका देने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बिजली सत्याग्रह में बिजली कंपनी के निजीकरण का मुद्दा भी शामिल रहेगा।
नक्सल मुक्त गांवों को एक-एक करोड़ देने का मुद्दा उठाया
बैज ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बस्तर पंडुम 2025 के दौरान नक्सल मुक्त घोषित गांवों के विकास के लिए एक-एक करोड़ रुपए देने के कथित वादे का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन गांवों को विकास कार्यों के लिए राशि कब मिलेगी।
उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार मुआवजे के लिए भटक रहे हैं और मुख्यधारा में लौटे समर्पित नक्सलियों को भी पुनर्वास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने जेलों में बंद आदिवासियों को लेकर भी सवाल उठाया। बैज ने आरोप लगाया कि हजारों आदिवासियों पर नक्सलियों का सहयोगी होने का फर्जी आरोप लगाकर उन्हें जेलों में रखा गया है। उन्होंने उनकी रिहाई की मांग की।
