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भू‑विस्थापित किसानों की मांग- हमें मेडिकल सुविधा दी जाए

अकलतरा। जेएसडब्लू-केएसके पावर प्लांट से प्रभावित आठ गांवों के भूविस्थापित किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में भूविस्थापित किसान और प्लांट प्रभावित ग्रामीण उपस्थित हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त कर रहे लाभार्थियों को कम से कम एक बार अपना उत्तराधिकारी (नॉमिनी) बदलने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों की तरह भूविस्थापित किसानों और पेंशनधारियों को भी राज्य कर्मचारी बीमा योजना (ईएसआईसी) के तहत चिकित्सा सुविधा दी जाए। जो पेंशनधारी नौकरी करना चाहते हैं, उन्हें तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। भूविस्थापित किसानों को दी जा रही पेंशन के साथ जीवन निर्वाह भत्ता आजीवन दिया जाए।

समिति के सचिव अविनाश सिंह ने कहा कि यदि पति-पत्नी के अलग-अलग लाभार्थी कार्ड पूर्व में प्लांट द्वारा बनाए गए हैं, तो दोनों को पूर्ण पेंशन लाभार्थी मानते हुए अलग-अलग पेंशन दी जाए। यदि किसी व्यक्ति ने वैध रूप से गोदनामा बनवाया है, तो कंपनी को उसे मान्यता देते हुए उसका उत्तराधिकारी मानकर पेंशन देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्लांट प्रबंधन द्वारा प्रभावित गांवों में हर महीने या तीन महीने में एक बार जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन तत्काल शुरू किया जाए। उपाध्यक्ष सविता भारद्वाज ने कहा कि गांवों में हर महीने लगने वाले मेडिकल कैंप को पिछले दो वर्षों से बंद कर दिया गया है, जिसे तत्काल पुनः शुरू किया जाए ताकि भूविस्थापितों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े और उन्हें गांव में ही चिकित्सा सुविधा मिल सके।

बैठक को राकेश कुमार साहू, उपेंद्र शांडिल्य, सनत साहू, कमलेश डहरिया और बुद्धेश्वर सिंह ने भी संबोधित किया। बैठक में मांगों के संबंध में प्लांट प्रबंधन और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। बैठक में रविंद्र महिपाल, गिरिवर शांडिल्य, सुरेंद्र साहू, कमलेश डहरिया, रामकुमार निर्मलकर, गोविंद पांडेय, राधे राठौर, राजकुमार राठौर, चंद्रप्रकाश महिपाल, मनोज साहू, जयनंदन कैवर्त्य, राजू गंधर्व, देवेश सिंह, संतोष नायक, कमलकुमारी, भवानी शंकर निर्मलकर, दीपिका महंत, राजेंद्र दास सहित आठ गांवों से आए भूविस्थापित किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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