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डिप्टी रेंजर ने ग्रामीणों को दी ‘उठवा लेने’ की धमकी:वन समिति चुनाव में गड़बड़ी, फेंसिंग-कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप पर भड़के, जांच की मांग

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष के चुनाव के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। दरअसल, ग्रामीणों के आरोपों पर डिप्टी रेंजर भड़क गए। उन्होंने ग्रामीणों को खुलेआम ‘एक मिनट के भीतर उठवा लेने’ की धमकी दी। यह घटना किसी ग्रामीण के मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर सवाल उठाते हुए हंगामा किया। साथ ही ग्रामीणों ने चुनाव प्रक्रिया में भी धांधली का आरोप लगाया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को घेरा।

वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने वन विभाग के निर्माण कार्यों की जांच और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह मामला कटघोरा वनमंडल के सुदूर वनांचल ग्राम जलके का है।

यह मामला कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम जलके का है। यहां ग्राम वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

इस चुनाव में समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए थे। चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए वन विभाग के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद थे।

चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने उठाए निर्माण कार्यों पर सवाल

चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि फेंसिंग कार्य में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार किया गया है।

उनका कहना है कि जंगल में लगाए गए खंभे पूरी तरह जमीन में नहीं गाड़े गए हैं, बल्कि करीब 50 फीसदी ही अंदर डाले गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चुनाव प्रक्रिया में भी धांधली का आरोप लगाया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को घेरना शुरू कर दिया।

इसी बहस के दौरान मौके पर मौजूद डिप्टी रेंजर अयोध्या सोनी अपना आपा खो बैठे। ग्रामीणों के सवालों से बौखलाए डिप्टी रेंजर ने उन्हें ‘एक मिनट के भीतर उठवा लेने’ की धमकी दे डाली।

अधिकारी पर धमकी देने के आरोप के बाद कार्रवाई की मांग

सरकारी पद पर बैठे अधिकारी के मुंह से ऐसी धमकी सुनकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि अधिकारी जनता के सेवक होते हैं और उन्हें आम लोगों को धमकाने या “उठवा लेने” जैसी बातें करने का कोई अधिकार नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने अधिकारियों को जंगल की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी है, न कि आम नागरिकों को डराने-धमकाने की। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से प्रशासन पर सवाल उठते हैं।

ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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