नई दिल्ली, एजेंसी। देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार अपने इस्तीफे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। मैंने पीएम मोदी से बातचीत करने के बाद ही पद छोड़ा।’
उन्होंने कहा, ‘जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। इसलिए मेरे लिए पद जरूरी नहीं था।’
प्रधान ने ये बात शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में कही। यहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया।
इस कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। NEET पेपर लीक पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
प्रधान ने नारेबाजी पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं; स्पीच की 6 बातें
- प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘ मैं BJD कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और उनकी नारेबाजी से परेशान नहीं हूं। मैं किसान का बेटा हूं। आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी मैं वापस आऊंगा।’
- ‘मैंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया। जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक मुझ पर जताए गए भरोसे को नहीं तोड़ूंगा और ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिससे ओडिशा के गौरव और स्वाभिमान को ठेस पहुंचे।’
- ‘जेन जी की जिद के कारण मुझे परेशानी नहीं हुई। नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उसे समझना जरूरी है।’
- ‘भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 साल में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनके सपने हैं। वे भारत को विश्व गुरु बनाएंगे।’
- ‘इतिहास में युवाओं ने ही बदलाव का नेतृत्व किया और बलिदान दिया है। वे अपने समय के जेन जी थे।’
- ‘मैंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने के लिए उनकी मंजूरी मांगी। पीएम सहमत हुए और बाद में युवाओं से बातचीत भी की। फिर मैंने इस्तीफा दिया।’
मोदी सरकार में अब तक 4 शिक्षा मंत्री, जोशी को अतिरिक्त प्रभार
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक केंद्र में 4 पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। इनमें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। प्रह्लाद जोशी को प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र

1997 में पेपर लीक प्रदर्शन में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। उनको बुरी तरह पीटा गया था। चेहरे पर चोटें भी आईं थीं। -फोटो क्रेडिट:TNIE
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।
