नई दिल्ली, एजेंसी। सोने की कीमतों में इस साल आई तेजी का असर अब ज्वेलरी बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। महंगे सोने के कारण ग्राहकों का रुझान हीरे जड़े कम कैरेट वाले सोने के आभूषणों की ओर बढ़ रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका में करीब चार साल की मंदी के बाद डायमंड जूलरी की मांग में सुधार हुआ है। इससे भारतीय हीरा उद्योग को भी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस बढ़ती मांग के बीच देश के सबसे बड़े हीरा कारोबार केंद्र सूरत में कच्चे हीरों की कमी कारोबारियों के लिए नई चुनौती बन गई है।
इस साल जनवरी में सोने की कीमत 1.8 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई लेकिन सोना अब भी पिछले साल के मुकाबले काफी महंगा है। इसी वजह से लोग पारंपरिक सोने के भारी आभूषणों के बजाय हीरे जड़े हल्के और कम कैरेट वाले गहनों को पसंद कर रहे हैं।
सूरत में कच्चे हीरों की कमी, 20% तक बढ़े दाम
एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के हीरा उद्योग में चार साल की मंदी के बाद पिछले दो महीनों से कारोबार में सुधार हुआ है। अमेरिका से डायमंड और डायमंड जूलरी की मांग बढ़ने के साथ दिवाली के सीजन ने भी बाजार को मजबूती दी है लेकिन सूरत में 20 हजार रुपए से कम कीमत वाले कच्चे हीरों की उपलब्धता घट गई है।
पिछले दो महीनों में इन कच्चे हीरों की कीमतों में 10 से 20% तक बढ़ोतरी हुई है। इसका असर छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। कई कारोबारियों को कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण पीक सीजन में भी अपना काम बंद करना पड़ा है।
उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अफ्रीका में हीरे का खनन प्रभावित हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे हीरों की सप्लाई कम हो गई है।
अमेरिकी बाजार से भारतीय कारोबार को उम्मीद
अमेरिका भारत के लिए जेम्स एंड जूलरी का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग को उम्मीद है कि अमेरिकी राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इससे भारतीय निर्यातकों पर टैरिफ का दबाव कम हो सकता है।
अमेरिका की टैरिफ नीतियों का भारतीय जेम्स एंड जूलरी सेक्टर पर बड़ा असर पड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को भारत का निर्यात 44.92% गिरकर 5.09 अरब डॉलर रह गया था।
तीन साल की गिरावट के बाद स्थिर हो सकता है कारोबार
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, नेचुरल डायमंड इंडस्ट्री का रेवेन्यू चालू वित्त वर्ष में 14.2 से 15.2 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के लगभग बराबर रहेगा। इससे पहले लगातार तीन साल तक इस उद्योग के रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की गई थी।
भारत तराशे हुए हीरों का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है। वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 18.20% रही है। अमेरिका के अलावा यूएई, हॉन्ग कॉन्ग, बेल्जियम, ब्रिटेन, थाईलैंड, इजरायल, सिंगापुर, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भारतीय जेम्स एंड जूलरी के प्रमुख बाजार हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल जेम्स एंड जूलरी निर्यात 27.71 अरब डॉलर रहा था, जो देश के कुल वस्तु निर्यात का 15.71% था। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार भारतीय हीरा उद्योग के लिए अहम साबित हो सकता है। हालांकि, कच्चे हीरों की कमी और महंगी सप्लाई के कारण कारोबारियों की चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

