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बैलेट पेपर भी नहीं जिता पाए

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बैलेट पेपर की माँग उठी, ईवीएम पर उँगली उठी,

हार मिली सवाल अनेक, जीत मिले वाह अनेक !

कभी मशीनों पर दोष मढ़ा, जनता से नाता तोड़ा,

जनता ने फैसला सुनाया, नेताओं ने शोर मचाया।

हो बंगाल व बिहार का रण, जनता ने चुना शासन,

वादों-नारों की दुनिया में,किसने जीता जनता मन?

राहुल सड़कों पे निकले, ईवीएम के सवाल उछले,

बैलेट पेपर से जीत मिलेगी, जनता सोच बदलेगी?

केरल में सवाल खड़े हैं,कांग्रेस के सपने कहाँ पड़े?

गठबंधन नाव डगमगाती, ना ‘किनारे-भँवर’ जाती।

समाजवादी राह चले, बसपा के भी क्या दाँव चले,

विपक्षी एकता निराली, चुनाव लिखें अलग कहानी।

जनता को काम व विकास, महँगाई राहत व आस,

रोजगार, शिक्षा व सम्मान, यही हैं असली अरमान।

हार हुई तो मंथन करिए, जन-मन का चिंतन करिए,

मशीनें दोषी ठहराने से, नहीं बदलेंगे हार के मायने!

बैलेट या ईवीएम दौर, जनता निर्णय का बड़ा जोर,

लोकतंत्र में जनता महान,फैसले को करिए प्रणाम।

नतीजा हार-जीत नहीं, ये जनता का संदेश है भाई,

जो जनता मन पढ़ पाएगा, वही परचम लहराएगा!

संजय एम तराणेकर

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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