स्व रचित रचना-मृदुला रोजिन्दार, भिलाई
अंधकार को कर दे प्रकाशमान मैं वो दीया हूँ
तुलसी के पास स्थान मेरा है मैं वो दीया हूँ
श्री लक्ष्मी आवे ये प्रार्थना करती मैं वो दीया हूँ
सुंदर आकार और प्रकार मेरा मैं वो दीया हूँ
तेल से अंग अंग भीगे मैं वो दीया हूँ
मुझे सजाते हौसले की कमी नही मैं वो दीया हूँ
सबको समान प्रकाश देती मैं वो दीया हूँ
मेरे बिना दिवाली अपूर्ण है मैं वो दीया हूँ
दुख में भी दस दिन एक देह का साथ देती मैं वो दीया हूँ
जलती रहती हूँ हमेशा घर आंगन मैं वो दीया हूँ
स्व रचित रचना
मृदुला रोजिन्दार
भिलाई

